
फिल्म धूम और धूम-2 जैसी सुपरहिट फिल्में देने के बाद निर्देशक संजय गढ़वी अपनी नई फिल्म किडनैप को लेकर इन दिनों खूब चर्चा में हैं। गौरतलब यह है कि धूम से पहले संजय निर्देशित दो और फिल्में तेरे लिए और मेरे यार की शादी है रिलीज हो चुकी हैं। तीन फिल्मों की शानदार पारी खेलने के बाद उन्हें कुछ प्रूव करने की जरूरत तो नहीं है, लेकिन फिर भी किडनैप को लेकर अधिकांश ट्रेड पंडितों का कहना यही है कि यह संजय के लिए अग्निपरीक्षा है। वैसे, हैरत की बात तो यह है कि खुद वे भी यही सोचते हैं। आइए जानते हैं क्या कहते हैं संजय..
किडनैप को लेकर आपके मन में क्या चल रहा है?
यह फिल्म मेरे लिए वाकई एक अग्निपरीक्षा है। अगर धूम और धूम-2 की तरह किडनैप भी दर्शकों द्वारा पसंद की जाती है, तो मैं हमेशा के लिए पास मान लिया जाऊंगा। मेरे लिए यह त्रासदी है कि लगातार तीन सुपरहिट फिल्में देने के बाद भी मुझे इस दौर से गुजरना पड़ रहा है! दरअसल, मेरी इन सफलताओं को हमेशा आदित्य चोपड़ा के साथ जोड़ा गया है। लोग दबी जुबान में यही कहते रहे हैं कि इन फिल्मों के असली डायरेक्टर तो आदित्य थे। संजय तो सेट पर केवल टेक-रिटेक ही देखता था! खैर, किडनैप सच्चाई बयां कर देगी।
इतने प्रेशर के साथ अच्छा काम हो सकता है क्या?
प्रेशर जरूर था, लेकिन मैंने इस प्रेशर को चुनौती के रूप में लिया। फिल्म के लिए मैंने डबल-ट्रिपल मेहनत की है। कई रात सोया नहीं। स्टोरी, स्क्रिप्टिंग, कास्टिंग, गीत लेखन, नृत्य, गीत-संगीत, एडिटिंग.., हर जगह मैंने बहुत मेहनत की है। एक-एक सीन के लिए अपना सब कुछ झोंक दिया है। सच तो यह है कि हर नजरिए से एक अच्छी फिल्म बनाने की कोशिश की है।
आपने कहीं कहा है कि पूरी फिल्म आपके ही कंधे पर थी?
हां, यह सच है। दरअसल, हमारे निर्माता ने मुझे सारी सुविधाएं मुहैया करवाई थीं। बाकी सारी जिम्मेदारी मेरे ही कंधे पर थी। यहां आदित्य जैसे निर्माता का रचनात्मक सपोर्ट नहीं था।
रचनात्मक सपोर्ट से आपका आशय?
इंडस्ट्री में विपुल शाह, साजिद नाडियाडवाला और आदित्य चोपड़ा जैसे कुछ ऐसे क्रिएटिव प्रोड्यूसर हैं, जिन्हें दर्शकों की नब्ज के साथ कहानी, स्क्रिप्टिंग, गीत-संगीत और फोटोग्राफी आदि की अच्छी समझ है। कहानी को कब और किस तरह का मोड़ दिया जाए, किसी नए ट्रैक को कहानी की मुख्य धारा से कैसे जोड़ा जाए, इन बातों की उन्हें अच्छी समझ है। यदि यह कहें कि उनके सुझाव काम को और सहज बना देते हैं, तो गलत नहीं होगा। इसे दखलंदाजी नहीं कहा जाना चाहिए।
आपने किडनैप में नया क्या दिखाने की कोशिश है?
अक्सर हम मेकर्स फिल्म की रिलीज के समय कहते हैं कि काफी कुछ नया है फिल्म में। मैं इन्हें बेकार बातें मानता हूं। वैसे, किडनैप में कुछ नयापन लोग महसूस करेंगे। जहां तक कुछ खास की बात है, तो वह है पिता-पुत्री के बीच का रिलेशन, जज्बात, ड्रामा, लाजवाब संगीत वगैरह।
किडनैप की कहानी क्या है?
यह पिता-पुत्री के रिश्तों को रेखांकित करने वाली फिल्म है। सोनिया एक युवती है। वह अपनी मां मल्लिका और नानी के साथ रहती है। मल्लिका का अपने पति से तलाक हो चुका है। एक दिन सोनिया कबीर द्वारा किडनैप कर ली जाती है। कबीर सोनिया को इस शर्त पर छोड़ने के लिए तैयार होता है कि विक्रांत रैना से उसकी बात कराई जाए। दरअसल, विक्रांत मशहूर बिजनेस टायकून है, वह न्यूयॉर्क में रहता है। अंत में विक्रांत इंडिया आता है और कबीर से सोनिया को छुड़ाता है।
फिल्म में संजय दत्त के अपोजिट उनसे आधी उम्र वाली विद्या मालवदे को लेने की वजह?
इस रोल के लिए मैंने विद्या से पहले कई बड़े स्टार्स से बात की थी। मुझे संजू के स्तर के स्टार ऐक्ट्रेस की जरूरत थी। दरअसल, मैंने जिनसे भी बात की, सभी ने मिनीषा की मां बनने से मना कर दिया। एक दिन विद्या किसी काम से मेरे पास आई। उन्होंने मेरे साथ फिल्म करने की दिलचस्पी दिखाई, तो मैंने पूछा कि क्या वे यह रोल करने के लिए तैयार हैं? उन्होंने हां कहा। मुझे खुशी हुई।
इमरान खान की पहली फिल्म जाने तू या जाने ना हिट हुई। इसका फायदा आपकी फिल्म को मिलेगा?
इमरान को जब मैंने साइन किया था, तब उनकी जाने तू. बस शुरू हुई थी। हमने कभी नहीं सोचा था कि यह फिल्म इतनी बड़ी हिट होगी! इसका फायदा किडनैप को जरूर मिलेगा।
चर्चा है कि किडनैप की कहानी काफी पुरानी है?
धूम के बाद मैंने किडनैप की वनलाइन स्टोरी आदित्य को सुनाई थी। स्टोरी सुनकर वे प्रभावित हुए। धूम के बाद वे किडनैप पर ही काम करना चाहते थे, लेकिन अचानक उनका इरादा बदल गया। उन्होंने धूम-2 के बाद किडनैप बनाने की बात कही जरूर, लेकिन मैं यशराज बैनर के साथ तीन फिल्मों के कॉन्ट्रैक्ट को आगे नहीं बढ़ाना चाहता था। मैंने कहा, किडनैप का निर्देशन मैं ही करना चाहता हूं, तो उन्होंने फिल्म की स्क्रिप्ट मुझे दे दी, जिसे अष्ट विनायक के सहयोग से मैंने पूरा किया है। अब लोग इसके बारे में क्या कहते हैं, इसका इंतजार है।
-एस राजेश