ईश्वर में विश्वास बढ़ गया है: पायल रोहतगी

ईश्वर में विश्वास बढ़ गया है: पायल रोहतगी

हाल ही में खत्म हुए शो बिग बॉस के घर में रहकर खूब सुर्खियां बटोरने के कारण पायल रोहतगी इन दिनों बेहद खुश हैं। इस शो से मिली लोकप्रियता को भुनाने में वे इन दिनों जुट गई हैं। पिछले दिनों दिल कबड्डी में वे इरफान खान जैसे सधे हुए कलाकार के साथ अभिनय करती दिखीं। अब पायल अपने लिए फिल्मों के चयन को लेकर सावधानियां बरत रही हैं। दरअसल, वे चाहती हैं कि उनका नाम जल्द ही मुख्यधारा की अभिनेत्रियों की सूची में शामिल हो जाए और इस दिशा में उन्होंने प्रयास भी शुरू कर दिए हैं। बातचीत पायल रोहतगी से..

लंबे अर्से बाद आपकी फिल्म दिल कबड्डी आई। इतने लंबे गैप की वजह?

मेरी पिछली फिल्म थी ढोल। इसकी रिलीज के एक वर्ष बाद दिल कबड्डी रिलीज हुई। इस गैप की वजह कुछ खास नहीं है। बस, अब मैं अपना सारा ध्यान क्वालिटी सिनेमा की ओर लगा रही हूं। दिल कबड्डी में सभी ने मुझे पसंद किया, यह मेरे लिए बड़ी बात है। इसके लिए मुझे अच्छे रिव्यूज भी मिले, बहुत अच्छा लगा। सच तो यह है कि बिग बॉस के बाद मेरे पास फिल्मों में अभिनय के प्रस्ताव की भरमार लग गई है। जल्द ही कुछ अच्छी फिल्मों में दर्शकों को मैं नजर आऊंगी।

बिग बॉस का अनुभव कैसा रहा और इससे जुड़कर आपने क्या खोया और क्या पाया?

बिग बॉस के अनुभव को अगर एक शब्द में बताना हो, तो मैं कहूंगी अजीबोगरीब। चौबीस घंटे माइक के सामने रहना.., बर्तन धोना, कपड़े साफ करना.. वगैरह। दरअसल, यह सब पहले मेरे साथ नहीं हुआ था। मेरी प्रोफेशनल लाइफ केलिए बिग बॉस का घर बहुत फायदेमंद रहा। जितनी देर मैं बिग बॉस के कैमरे के सामने रही, उतनी देर कभी किसी फिल्म में नहीं दिखी। इसमें मुझे पॉजिटिव विजिबिलिटी मिली। बिग बॉस से मैंने बहुत कुछ पाया है।

बिग बॉस के घर में रहने के बाद जब आप बाहर की दुनिया में आई, तो स्वयं में किस तरह का परिवर्तन महसूस किया?

बहुत बदल गई हूं। फैमिली को पहले से ज्यादा वैल्यू देने लगी हूं। भगवान में मेरा विश्वास बढ़ गया है। मैं मां के और करीब हो गई हूं। मुझे लगता है कि बिग बॉस के घर से निकलने के बाद मुझमें एक बड़ा परिवर्तन आया है। मैं अब बहुत बोलने भी लगी हूं। पहले मैं बहुत कम बोलती थी, थोड़ी शाई किस्म की इनसान थी, लेकिन अब बहुत बोलती हूं।

जब आपने आशुतोष की जीत की खबर सुनी, तो आपकी प्रतिक्रिया क्या हुई?

आशु डिजर्विग थे। दरअसल, उनका ढाबा ही उनकी जीविका का जरिया है। उन्हें अपनी बहन की शादी भी करनी थी। पैसों की सबसे अधिक जरूरत आशुतोष को ही थी। उनके लिए एक करोड़ रुपये ज्यादा महत्व रखते हैं। आशु की जीत से मुझे बेहद खुशी हुई।

अभी तक के अपने फिल्मी सफर से आपने क्या सीखा?

मेरा सफर अभी भी चल रहा है और हर दिन कुछ-न-कुछ सीख रही हूं। बिना किसी फिल्मी पृष्ठभूमि और गॉडफादर के मैंने हिंदी फिल्मों में अपनी किस्मत आजमाने की सोची, यही मेरे लिए बड़ी बात थी। मिडिल क्लास से बिलॉन्ग करती थी। गलत-सही की पहचान नहीं थी। फिल्मी दुनिया में अपने अनुभव के कारण मैं अब गलत और सही के अंतर को पहचानने लगी हूं। एक पॉजिटिव पर्सन बनकर उभरी हूं। काफी उथल-पुथल के बाद, अब मेरा करियर सही ट्रैक पर आ गया है।

आने वाले दिनों में दर्शक आपको और किन फिल्मों में देखेंगे?

अब मैं सिर्फ वही फिल्में कर रही हूं, जिनमें भूमिका दमदार है। पिछले महीने मैंने दो बड़े बजट की फिल्में साइन की हैं, जिनमें से एक पॉलिटिकल ऐक्शन-थ्रिलर है। इन फिल्मों के बारे में मैं अभी ज्यादा कुछ नहीं बता सकती। जब इनकी रिलीज की तारीख करीब आएगी, उनके बारे में तभी बात करूंगी।

-मुंबई प्रतिनिधि

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