
प्रीति जिंटा रुपहले पर्दे को अपनी ऊर्जा और खिलखिलाहट से पिछले कई वर्षो से गुलजार करती आ रही हैं। दिल से से अपनी फिल्मी पारी की शुरुआत करने वाली इस अदाकारा का फिल्मी सफर काफी रोचक रहा है। यदि उनकी फिल्मों की सूची पर नजर डालें, तो उन्होंने हर तरह की भूमिकाओं को पर्दे पर जिया किया है। क्या कहना की अविवाहित मां की भूमिका हो या लक्ष्य में युद्ध पत्रकार की या वीर जारा में पाकिस्तानी युवती की भूमिका..। उन्होंने हमेशा ही अपनी भूमिकाओं में विविधता को महत्व दिया है। पिछले दिनों हुई मुलाकात में प्रीति ने अपने फिल्मी करियर की पांच पसंदीदा फिल्मों के बारे में बताया..
मेरे लिए मेरी सभी फिल्में स्पेशल हैं। पहली फिल्म दिल से से लेकर विदेश तक सारी फिल्में मुझे पसंद हैं। यदि इन फिल्मों में मुझे अभिनय करने का मौका नहीं मिला होता, तो आज मैं जहां हूं, शायद नहीं होती। अपने फिल्मी करियर की पांच पसंदीदा फिल्में चुनना मेरे लिए काफी मुश्किल है। वैसे, निजी तौर पर मुझे क्या कहना, दिल चाहता है, कल हो न हो, वीर जारा और विदेश काफी पसंद हैं। इन पांच फिल्मों को चुनने की वजह है कि इन सब में मेरा अंदाज अलग है। इन फिल्मों में खुद को देखकर मुझे गर्व महसूस होता है कि मैं इतनी विविध भूमिकाएं निभा सकती हूं।
विदेश : यह मेरे फिल्मी करियर की सबसे उल्लेखनीय फिल्म है। दीपा मेहता के निर्देशन में मुझे अभिनय करने का मौका मिला। मेरे लिए यह गर्व की बात है। इस फिल्म के लिए मैंने काफी मेहनत भी की थी। इसमें एक्टिंग के लिए मुझे शिकागो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में बेस्ट ऐक्ट्रेस का अवार्ड मिला। विदेश मेरे लिए इस लिए भी खास है, क्योंकि यह महिला-प्रधान फिल्म है। मैं अपनी फिल्मों के माध्यम से कोशिश करती हूं कि महिलाओं को उनके अधिकारों के लिए जगा सकूं। विदेश में अभिनय मेरे इसी प्रयास की अहम कड़ी थी।
क्या कहना : यह मेरे दिल के काफी करीब है। फिल्मी करियर के शुरुआती लमहों में ही मुझे क्या कहना जैसी गंभीर फिल्म में अभिनय करने का अवसर मिला। इसका सब्जेक्ट काफी संवेदनशील था। आज भी जब मैं इसे देखती हूं, तो मेरी आंखों में आंसू आ जाते हैं। सच कहूं, तो क्या कहना ने अच्छी ऐक्ट्रेस के रूप में मुझे शुरुआती पहचान दी।
वीर जारा : इसमें जारा की भूमिका निभाना काफी चैलेंजिंग था। एक पर्टिकुलर एज की भूमिका नहीं थी इस फिल्म में। यंग एज से लेकर बुढ़ापे तक की भूमिका थी। काफी रिसर्च करनी पड़ी। पाकिस्तानी युवती की भूमिका निभाने के लिए मुझे अपने बोलने के लहजे पर भी मेहनत करनी पड़ी। कुल मिलाकर कह सकती हूं कि वीर जारा ने मुझे अपनी अभिनय क्षमता से रूबरू कराया।
दिल चाहता है : इसने नए दौर के सिनेमा की शुरुआत की। मुझे आमिर खान के साथ काम करने का अवसर मिला। दिल चाहता है ऐसी फिल्म है, जिसे लोग बार-बार देख सकते हैं। दर्शक के रूप में मुझे ऐसी फिल्में पसंद आती हैं।
कल हो न हो : इसकी शूटिंग को मैंने खूब एंज्वॉय किया था। चूंकि इसकी चरित्र नैना से मैं काफी हद तक खुद को आइडेंटिफाई करती हूं, इसलिए भी यह फिल्म मेरे लिए स्पेशल है। इसके लिए बेस्ट ऐक्ट्रेस का अवार्ड मुझे मिला। कल हो न हो के सेट पर ही शाहरुख और सैफ के साथ मेरी दोस्ती को नया आयाम मिला। इस तरह कई वजहें हैं, जो कल हो ना हो को मेरी पसंदीदा फिल्म बनाती है।
मुंबई प्रतिनिधि