
सलमान खान एक बार फिर दिख रहे हैं छोटे पर्दे पर। 10 का दम के दूसरे भाग में भी वे अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। बातचीत जोशीले और बेबाक सलमान से..
10 का दम के दूसरे भाग में आपकी उपस्थिति ने दर्शकों की उत्सुकता बढ़ा दी है। क्या कहेंगे?
खबरों की मानें, तो मैंने पहले भाग में सोनी टीवी को बहुत परेशान किया था। अब इतना परेशान करने के बाद भी यदि वे 10 का दम में मुझे वापस लेकर आने के लिए तैयार हो गए हैं, तो कुछ तो बात होगी ही! इसका पहला भाग दर्शकों को पसंद आया। उनकी पसंद का खयाल रखते हुए दूसरा भाग तो करना ही था। यदि लोग इसमें मुझे स्वीकार नहीं करते, तो दूसरे भाग की बात ही नहीं होती। मैं तो चाहूंगा कि इसके तीसरे और चौथे भाग को भी होस्ट करूं।
लगता है, 10 का दम के संचालन ने आपको धैर्यवान बना दिया है?
मैं हमेशा से धैर्यवान हूं। लोग मुझे पता नहीं क्या-क्या बना देते हैं? यदि मुझसे उल्टे-सीधे सवाल किए जाएंगे, तो मैं रिएक्ट तो करूंगा ही! मैं जैसा हूं, वैसा ही इस शो में दिखता हूं। रोजाना के जीवन में भी मैं ऐसा ही रहता हूं। उसमें किसी तरह की नॉवेल्टी नहीं होती है। कई बार शूटिंग के दौरान पड़ रहे खलल से तनाव होता है। लाइट चेहरे पर आ रही होती है, आसपास बहुत कुछ हो रहा होता है। यह सब डिस्टर्ब करता है। 10 का दम की शूटिंग के दौरान मैं बैड मूड में हूं या अच्छे मूड में, इसकी जानकारी उन लोगों को नहीं होती, जो शो में भाग लेने आते हैं।
इस शो के लिए आपने प्राइस घटाई है?
मंदी का दौर है। सेटेलाइट चैनलों में भी इसके कारण आठ-दस प्रतिशत का नुकसान हुआ है। इसलिए मैंने उस नुकसान को ध्यान में रखते हुए अपनी प्राइस घटाई है, लेकिन उतनी भी नहीं, जितनी खबरों में छप रही है।
यह शो सप्ताह में एक ही दिन प्रसारित हो रहा है। इसकी वजह?
मुझे अच्छा लगता यदि शो हफ्ते में दो बार आता, लेकिन चैनल वालों ने ऐसी नीति अपनाई है। मुझे भी पता नहीं है कि ऐसा क्यों हुआ है? लेकिन कोई वजह तो होगी ही? मैं तो यही मानता हूं कि जो चलता है, उसे बराबर चलने दो। फिलहाल 10 का दम के चौदह एपिसोड होने तय हुए हैं। एपिसोड के बढ़ाने की योजना बन रही है।
आम लोगों से मिलने के दौरान किस तरह के अनुभव से आप गुजरते हैं?
मैंने एक ही चीज अनुभव की है कि मेरे सोचने के ढंग और शो में आए लोगों के सोचने के ढंग में बेहद समानताएं हैं। मैं आम लोगों से खुद को जुड़ा हुआ पाता हूं। मैं कभी स्टार नहीं बनना चाहता। अपनी लाइफ जीना चाहता हूं। आम इनसान की तरह। मैं रिक्शे में बैठता हूं, बरिस्ता जाता हूं। नॉर्मल रहना चाहता हूं। जो लोग इस शो में आते हैं, वे मुझसे उम्मीद करते हैं कि मैं उनके साथ स्टार की तरह पेश आऊं। इसी वजह से वे मुझसे मिलकर चौंक जाते हैं। उन्हें लगता है, मैं तो उनकी तरह ही हूं।
आप भी छोटे पर्दे का हिस्सा हैं। इसके बारे में आपकी क्या राय होगी?
टीवी इंडस्ट्री में बहुत बदलाव आया है। पहले दूरदर्शन का जमाना था। अब अलग-अलग कॉन्सेप्ट पर सीरियल बन रहे हैं। बालिका वधू मैंने कुछ देर के लिए देखा था। अच्छा कॉसेप्ट है, लेकिन मुझे लगता है कि टीवी पर ऐसे कार्यक्रम ही दिखने चाहिए, जो हमारी परंपरा से जुड़े हुए हों। पूरा परिवार साथ देखता है। इसमें ऐसे दृश्य नहीं दिखने चाहिए, जिसे देखकर लोग अच्छा फील न करें।
इस शो में लोग अक्सर आपसे शादी से जुड़े सवाल करते थे। इस बार भी आप इसके लिए तैयार होगें?
पूरी तरह तैयार हूं। मैंने पिछली बार भी कहा था और इस बार भी कहूंगा कि शादी तो जरूर करूंगा, लेकिन कब होगी? नहीं मालूम।
-सौम्या अपराजिता