मिशन इस्तांबुल: एक्शन और रोमांच

मिशन इस्तांबुल: एक्शन और रोमांच

हिन्दी फिल्मों के निर्माता-निर्देशक अब विश्व घटनाक्रम पर भी अपनी नजर रख रहे हैं और उससे प्रेरित होकर फिल्में बनाने का जोखिम भी उठा रहे हैं। परिणामस्वरूप, काबुल एक्सप्रेस और अब, मिशन इस्तांबुल जैसी फिल्में अस्तित्व में आ रही है। अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद और जुझारू पत्रकारिता को जोड़ती मिशन इस्तांबुल के निर्देशक अपूर्व लाखिया हैं। अपनी पिछली फिल्म शूटआउट.. की ही भांति अपूर्व ने इस फिल्म का विषय भी वास्तविक और प्रासंगिक रखा है। मिशन इस्तांबुल में जाएद खान, विवेक ओबेराय, निकितन धीर, शब्बीर अहलूवालिया, श्रिया शर्मा और नवोदित अभिनेत्री श्वेता भारद्वाज मुख्य भूमिकाओं में हैं।

विकास सागर मशहूर टेलीविजन चैनल का कर्तव्यपरायण और जुझारू पत्रकार है। विकास महत्वाकांक्षी है और लोकप्रिय है। विकास से प्रभावित होकर विवादित चैनल अल जोहरा के मालिक विकास को अपने चैनल के भारतीय ब्यूरो का मुखिया बनाने का निर्णय लेते हैं। विकास भी इसे स्वीकार कर लेता है क्योंकि उसे पता है कि विवादित होने के कारण यह चैनल अधिक-से-अधिक दर्शकों द्वारा देखा जाएगा। अल जोहरा चैनल से जुड़कर विकास को अंतरराष्ट्रीय स्तर के पत्रकारों के बीच अपनी पहचान बनाने का मौका भी मिलता है। शर्तो के अनुसार अल जोहरा चैनल के भारतीय ब्यूरो के मुखिया का उत्तरदायित्व संभालने से पूर्व विकास को तीन महीने की ट्रेनिंग के लिए इस्तांबुल जाना पड़ता है। इस्तांबुल जाने के बाद विकास के जीवन में कई ऐसे मोड़ आते हैं जब वह स्वयं को विपरीत परिस्थितियों में पाता है। अल जोहरा चैनल पर मशहूर और खतरनाक आतंकवादी अबु नाजिर की नजर है। वह हमेशा वीडियोफोन के जरिए भारत समेत कई देशों को धमकियां देता रहता है। विकास करीब से विश्व आतंकवाद के इस घिनौने चेहरे को देखता है। एक मिशन के अंतर्गत उसे अफगानिस्तान अबु नाजिर के कैंप में भेजा जाता है। अबु नाजिर के क्रूर चेहरे को करीब से देखकर विकास चकित रह जाता है। वापस, इस्तांबुल लौटकर वह भारत जाने की तैयारी करता है, पर तुर्की कमांडर रिजवान खान के आग्रह के कारण वह वापस नहीं जाता है। रिजवान और विकास मिलकर अबु नाजिर और उसके भाई खलील का मुकाबला करते हैं।

एक्शन और रोमांच से भरपूर मिशन इस्तांबुल का विषय हिन्दी फिल्मों के दर्शकों के लिए नया है। आमतौर पर भारतीय दर्शक प्रयोगों को पचा नहीं पाते हैं ऐसे में, अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद जैसे गंभीर विषय को केंद्र में रखकर बनायी गयी मिशन इस्तांबुल दर्शकों की कसौटी पर कितनी खरी उतरती है? देखना रोचक होगा।

-सौम्या अपराजिता

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