
मुख्य कलाकार : गोविंदा, आफताब शिवदासानी, मनोज बाजपेयी, रवि किशन, उपेन पटेल, प्रेम चोपड़ा, हंसिका मोटवानी और सेलिना जेटली आदि।
निर्देशक : गणेश आचार्य
तकनीकी टीम : निर्माता : कुमार मंगत, गीत : समीर, संगीत : नितिन अरोड़ा, सोनी चंडी
गणेश आचार्य प्रवीण नृत्य निर्देशक हैं। अपनी कॉमेडी फिल्म मनी है तो हनी है में भी वह अपनी प्रवीणता दिखाते हैं और खुद स्क्रीन पर आने का लोभ संवरण नहीं कर सके हैं। संभव है अगली बार वह खुद हीरो भी बन जाएं। उनकी फिल्म दर्शकों को यूं ही हंसाने की कोशिश करती है।
गणेश ने छह कलाकारों को जमा किया है और सभी को कहानी के हिसाब से एक-एक किरदार दिया है- स्ट्रगलिंग मॉडल और एक्टर से लेकर लालाभाई तक। मजेदार तथ्य यह है कि इन सभी किरदारों को लेकर अलग-अलग फिल्म तक बनायी जा सकती है। तमाम किरदार किसी न किसी गुनतारे में लगे हैं। फिल्म में तब मोड़ आता है, जब उन्हें केके जायसवाल की संपत्ति मिलती है। नाकारे किस्म के ये किरदार सहज ही मिल गए धन को लेकर ख्वाब पालते हैं। उनकी मंशाएं टकराती हैं और गणेश आचार्य को लगता है कि दर्शक हंस रहे होंगे।
कलाकारों में केवल मनोज बाजपेयी एक नए अंदाज में लुभाते हैं। पहली बार कॉमेडी करते हुए वह जमते हैं। गोविंदा की संभावनाओं का पूरा इस्तेमाल नहीं हो पाया है। माफ करें, इसे कॉमेडी समझ कर बच्चों के साथ देखने न चले जाएं। कुछ अश्लील और भद्दे प्रसंग हैं। दुर्भाग्य से इन्हें एडल्ट कॉमेडी मान लिया गया है।
-अजय ब्रह्मात्मज