
मुख्य कलाकार : अभिषेक बच्चन, जॉन अब्राहम, प्रियंका चोपड़ा, किरण खेर, शिल्पा शेट्टी आदि
निर्देशक : तरूण मनसुखानी
तकनीकी टीम : निर्माता - करण जौहर और हीरू जौहर, कथा-पटकथा - तरूण मनसुखानी, संवाद- अन्विता दत्त गुप्तन, गीत- अन्विता दत्त गुप्तन, कुमार और विशाल ददलानी, संगीत- विशाल शेखर
कल हो न हो में कांता बेन के मजाक की लोकप्रियता को करण जौहर ने गंभीरता से ले लिया है। अबकि उन्होंने इस मजाक को ही फिल्म की कहानी बना दिया।
दोस्ताना दो दोस्तों की कहानी है, जो किराए के मकान के लिए खुद को समलैंगिक घोषित कर देते हैं। उन्हें इस झूठ के नतीजे भी भुगतने पड़ते हैं। संबंधों की इस विषम स्थिति-परिस्थिति में फिल्म के हास्य दृश्य रचे गए हैं। शहर के युवा दर्शक इसे पसंद कर सकते हैं। करण की दूसरी फिल्मों की तरह इस फिल्म की शूटिंग भी विदेश में हुई है। इस बार अमेरिका का मियामी शहर है। वहां भारतीय मूल के दो युवकों को मकान नहीं मिल पा रहा है। एक मकान मिलता भी है तो मकान मालकिन अपनी भतीजी की सुरक्षा के लिए उसे लड़कों को किराए पर नहीं देना चाहती। मकान लेने के लिए दोनों खुद को समलैंगिक घोषित कर देते हैं। फिल्म को देखते समय याद रखना होगा कि यह भारतीय परिवेश की कहानी नहीं है। यह एक ऐसे देश की कहानी है, जहां का कानून समलैंगिक दंपति को रेसिडेंट परमिट देने में प्राथमिकता देता है। भारत में समलैंगिक संबंधों को अभी सामाजिकस्वीकृति नहीं मिली है।
निर्देशक तरूण मनसुखानी ने जॉन अब्राहम की सुडौल देहयष्टि का जमकर प्रदर्शन किया है। जॉन अब्राहम अपनी देह को लेकर बेफिक्र दिखते हैं। अभिनय के लिहाज से अभिषेक और जॉन अब्राहम ने अपने किरदारों को सहजता से निभाया है। प्रियंका चोपड़ा अभिनय के प्रति गंभीर हो गई हैं। फैशन के बाद दोस्ताना में भी वह जंचती है। इस फिल्म में बॉबी देओल सरप्राइज करते हैं। बाकी कलाकार सामान्य हैं।
-अजय ब्रह्मात्मज