
मुख्य कलाकार : विनय पाठक, सौरभ शुक्ला, दिव्या दत्ता, हर्ष छाया आदि।
निर्देशक : सौरभ श्रीवास्तव
तकनीकी टीम : निर्माता- जी लाइम लाइट, संगीत- बापी टुटुल, लेखक- ऋषि विरमानी, मनीषा ओझा, विपुल बिंजोला, असित कौल, सौरभ श्रीवास्तव
ओ माई गॉड ईमानदार राजेंद्र दूबे के द्वंद्व को सुंदर तरीके से चित्रित करती है। राजेन्द्र दूबे अपने आदर्श धीरूभाई अंबानी की तरह अमीर होना चाहते हैं। वे अमीर होने की युक्तियों में विफल होते रहते हैं। उनकी पत्नी सुमन की गुहार पर ईश्वर राजेंद्र दूबे की मदद करते हैं। उन्हें अचानक अमीर बना देते हैं। अकस्मात मिले धन से राजेंद्र दूबे विचलित हो जाते हैं। उनका द्वंद्व है कि यह उनका कमाया धन नहीं है। धीरे-धीरे उन्हें एहसास होता है कि सुख अमीर होने या धन अर्जित करने में नहीं है। सुख के लिए जरूरी है कि जिंदगी की छोटी खुशियों का आनंद लें। हिंदी फिल्मों में इन दिनों छोटी फिल्मों का फैशन चला हुआ है। यह फिल्म विनय पाठक और सौरभ शुक्ला पर टिकी हुई है। कुछ सालों पहले तक ऐसी फिल्म की कल्पना भी नहीं की जा सकती थी।
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-अजय ब्रह्मात्मज