
लोभ, छल, प्रपंच और साजिश की यह कहानी परेश रावल द्वारा मंचित एक गुजराती नाटक पर आधारित है। परेश रावल ने 1987 में इसका मंचन किया था। गुजराती में यह अत्यंत लोकप्रिय नाटक रहा है। खबर थी कि परेश रावल इसे स्वयं निर्देशित करना चाहते थे, पर उन्होंने यह जिम्मेदारी शिवम नायर को सौंप दी। शिवम नायर की पिछली फिल्म आहिस्ता आहिस्ता बेहतरीन फिल्म थी। शिवम नायर को उस फिल्म में सराहना मिली, लेकिन बॉक्स ऑफिस की कामयाबी दूर रही।
सुभाष (परेश रावल) पिछले दस सालों से इस कोशिश में है कि उसे फिल्मों में काम मिल जाए। काम न मिलने पर वह लोगों को ठगने का काम करता है और किसी तरह से गुजर-बसर कर रहा है। एक रात वह जोखिम लेकर आदेनवाला (नसीरुद्दीन शाह) की जान बचाता है। वह आदेनवाला को उनके घर छोड़ने आता है तो उनकी समृद्धि देखकर दंग रह जाता है। आदेनवाला उसे अपना ड्रायवर बना लेते हैं। आदेनवाला की बीवी मल्लिका (नेहा धूपिया) को अपने पति से सुभाष की नजदीकी पसंद नहीं आती। सुभाष को मल्लिका की साजिशों का पता चलता है तो वह उससे मिल जाता है। वे पारिवारिक वकील (बोमन ईरानी) की मदद से घर संभालने के लिए एक लड़की (तारा शर्मा)को ले आते हैं। अंत में एसीपी गोखले (ओम पुरी)और इंस्पेक्टर बोरकर (विवेक शौक) का आगमन होता है।
-अजय ब्रह्मात्मज