
सुभाष घई को उम्मीद थी कि युवराज दर्शकों को पसंद आएगी, लेकिन फिल्म के प्रति दर्शकों ने अधिक उत्साह नहीं दिखाया। खास कर महानगरों के दर्शक युवराज से दूर ही रहे। तीन भाइयों के परिवार की कहानी में उनकी रुचि नहीं दिखी। उत्तर भारत में अवश्य कुछ दर्शक मिले, मगर वहां के दर्शकों की गिनती फिल्म ट्रेड में नहीं होती। किसी भी फिल्म के हिट या फ्लाप के लिए मैट्रो और मल्टीप्लेक्स के दर्शक ही निर्णायक हो गए हैं। फिल्म को मुंबई में आरंभिक दिनों में 40 प्रतिशत दर्शक मिले, जो सुभाष घई और सलमान खान की फिल्म के लिए संतोषजनक नहीं कहे जा सकते। पिछले हफ्ते युवराज अकेली रिलीज थी, फिर भी वह दर्शकों को पर्याप्त संख्या में नहीं खींच सकी।
दोस्ताना छोटे शहरों और सिंगल स्क्रीन थिएटरों से लगभग निकल चुकी है। लेकिन मुंबई और दिल्ली के मल्टीप्लेक्स में अभी तक इसे दर्शक मिल रहे हैं। लिहाजा दोस्ताना हिट मानी जा रही है। इसकी कमाई औसत से ऊपर पहुंच रही है। दसविदानिया को दर्शकों ने अलविदा कह दिया है। एक विवाह ऐसा भी सीमित थिएटरों में प्रदर्शित हुई थी और उनमें अभी तक चल रही है।
- अजय ब्रह्मात्मज