संभल गई जोधा अकबर

संभल गई जोधा अकबर

ऐसा सुनहरा मौका हाल-फिलहाल में किसी फिल्म को नहीं मिला। जोधा अकबर की रिलीज के बाद के दो हफ्ते खाली रहे। संयोग ऐसा बना कि कोई भी फिल्म रिलीज नहीं हो सकी। फायदा जोधा अकबर को हुआ। आरंभिक रुझान से लग रहा था कि फिल्म घाटे में रहेगी, लेकिन सिनेमाघरों में प्रतियोगिता नहीं होने की वजह से जोधा अकबर संभल गई।

फिल्म की लंबाई के बारे में इतना ज्यादा लिखा और कहा गया कि उसे फिल्म की कमी मान लिया गया। हालांकि फिल्म देख कर निकले दर्शकों ने फिल्म की कहानी के हिसाब से लंबाई को जायज माना, लेकिन निगेटिव प्रचार तो हो चुका था।

जोधा अकबर को विवाद से भी नुकसान हुआ। कई राज्यों और शहरों में फिल्म का प्रदर्शन रद्द हुआ। दर्शक इस वजह से निराश हुए। निर्माता ने सुप्रीम कोर्ट में जाने का फैसला काफी देर से लिया। उन्हें यह कदम पहले ही उठा लेना चाहिए था। सवाल है कि जिस फिल्म को सेंसर बोर्ड ने सार्वजनिक प्रदर्शन की अनुमति दे दी है,उसका प्रदर्शन किसी जाति,समुदाय या संप्रदाय विशेष की आपत्ति से कैसे रोका जा सकता है? अफसोस की बात है कि ऐसा हुआ और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पैरोकार खामोश रहे।

बहरहाल जोधा अकबर एवरेज से आगे निकल चुकी है। बड़े शहरों और मल्टीप्लेक्स में इस फिल्म ने अच्छा व्यवसाय किया है। विदेशों में भी जोधा अकबर पसंद की जा रही है। लगता है कि विदेशी दर्शकों को इस फिल्म के जरिए भारतीय इतिहास की भव्यता से रू-ब-रू होने का मौका मिल रहा है। इस हफ्ते सुभाष घई की ब्लैक एंड ह्वाइट रिलीज हो रही है।

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