
जन्मस्थान- 3 जनवरी 1977
जन्मदिन- चंडीगढ़, पंजाब
कद- 5 फुट 7 इंच
गुल पनाग की पहचान पूर्व मिस इंडिया या एक अभिनेत्री तक ही सीमित नहीं है, वे अच्छी वक्ता और स्पोर्ट पर्सन भी हैं। गुल ने मिस इंडिया प्रतियोगिता के मंच से रूपहले पर्दे तक का सफर खामोशी से तय किया। दरअसल वे स्वयं को लंबी रेस का घोड़ा साबित करना चाहती हैं इसलिए कम मगर,गुणात्मक फिल्मों में अभिनय करना उनकी प्राथमिकता है।
चंडीगढ़ में पली-बढ़ी गुल प्रारंभ से ही पढ़ने-लिखने में अच्छी थीं। सैन्य पृष्ठभूमि में बचपन बिताने वाली गुल की रूचि खेल-कूद में भी रही है। सार्वजनिक मंच पर अपने विचार रखने में भी गुल बचपन से ही माहिर हैं। अपने व्यक्तित्व के विभिन्न पहलुओं को निखारने-संवारने वाली गुल ने युवावस्था में कई राच्य स्तरीय और राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पुरस्कार जीते। गणित से स्नातककी पढ़ाई के दौरान ही 1999 में आयोजित मिस इंडिया प्रतियोगिता में गुल ने सशक्त भागीदारी पेश की। उन्हें मिस इंडिया यूनिवर्स की उपाधि से नवाजा गया। मिस यूनिवर्स प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व करने के बाद गुल ने स्नातक की पढ़ाई पूरी की। धीरे-धीरे उनकी रूचि मॉडलिंग और अभिनय में होने लगी। कई टेलीविजन कमर्शियलों और धारावाहिक कश्मीर में अभिनय करने के साथ-साथ गुल ने राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर की डिग्री ली। धारावाहिक कश्मीर में अभिनय के दौरान गुल ने अपनी अभिनय-क्षमता को करीब से महसूस किया और हिन्दी फिल्मों की ओर रूख करने की योजना बनायी।
मिस इंडिया प्रतियोगिता से मिली पहचान के बावजूद गुल ने अपने फिल्मी सफर की शुरूआत धूप जैसी लीक से हटकर फिल्म से की। हालांकि,धूप में गुल ने सुधी दर्शकों को प्रभावित जरूर किया,पर उन्हें व्यापक पहचान नहीं मिल पायी। लगभग दो वर्ष के अंतराल पर गुल की दूसरी फिल्म जुर्म प्रदर्शित हुई। बॉबी देओल और लारा दत्ता अभिनीत जुर्म में गुल की मौजूदगी ने कोई खास प्रभाव दर्शकों पर नहीं छोड़ा। जुर्म ने बॉक्स ऑफिस पर दम तोड़ दिया। दर्शकों की इस अस्वीकृति ने गुल को एहसास दिलाया कि यदि,भीड़ में खुद को अलग साबित करना है, तो मुख्य धारा की बेतुकी फिल्मों से बेहतर है अच्छे विषय पर बनी फिल्मों में अभिनय करना। गुल के इसी प्रयास की पहली कड़ी साबित हुई डोर। डोर में पति के जीवन के लिए संघर्ष करती युवती की भूमिका में गुल ने अपने दमदार अभिनय से दर्शकों को चकित कर दिया। गुल के छोटे-से फिल्मी कैरियर में मील का पत्थर साबित हुई डोर। डोर के बाद बेहतरीन अभिनय का सिलसिला गुल ने जारी रखा। मनोरमा सिक्स फीट अंडर जैसी लीक से हटकर फिल्म में उन्होंने अपने अभिनय की गहरी छाप छोड़ी। लीक से हटकर फिल्मों के साथ-साथ मुख्य धारा की फिल्मों में भी गुल अपनी उपस्थिति दर्ज कराती रही हैं। समर 2007, हेलो, स्ट्रेट और अनुभव में भी उन्होंने अपने अभिनय से दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। हालांकि,गुल की पहचान मुख्य धारा की सफल अभिनेत्री के रूप में नहीं हो पायी है,फिर भी वे समीक्षकों की प्रशंसा हमेशा ही बटोरती आयी हैं।
अभिनय के साथ-साथ गुल सामाजिक और राष्ट्रीय सरोकारों से भी जुड़ी हैं। उन्होंने अभिव्यक्ति के आधुनिक माध्यम ब्लॉग पर भी अपनी उपस्थिति दर्ज करायी है। अपने ब्लॉग पर गुल नियमित रूप से राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियों पर विचार प्रकट करती रहती हैं। गुल कहती हैं,मैं जो भी करती हूं पूरे दिल से करती हूं। अपने काम को लेकर हंगामा बरपाना मेरी फितरत नहीं है। उम्मीद है, गुल यूं ही फिल्मों की चमकीली दुनिया में रहते हुए भी अपने सामाजिक और राष्ट्रीय सरोकारों से जुड़ी रहेंगी और अभिनेत्रियों की नयी पीढ़ी की प्रेरणास्रोत बनेंगी।
कैरियर की मुख्य फिल्में
वर्ष-फिल्म-चरित्र
2003-धूप- पीहू वर्मा
2005-जुर्म- सोनिया
2006-डोर- जीनत फातिमा
2007-मनोरमा सिक्स फीट अंडर- निम्मी
2008-समर 2007- विशाखा
2008-हेलो- प्रियंका
2009-स्ट्रेट- रेणु
2009-अनुभव-
आने वाली फिल्में- रण,ए रेक्टेंगुलर लव स्टोरी,हेलो डार्लिग।
-सौम्या अपराजिता