प्यार बिना जिंदगी अधूरी है: करण मेहरा

प्यार बिना जिंदगी अधूरी है: करण मेहरा

करण मेहरा इन दिनों न केवल कई धारावाहिकों में नजर आ रहे हैं, बल्कि बड़े पर्दे पर भी सक्रिय हैं। पिछले दिनों रिलीज हुई हैरी बावेजा- प्रियंका चोपड़ा अभिनीत फिल्म लव स्टोरी 2050 में दिखे। अब वे अभिषेक बच्चन-प्रियंका चोपड़ा स्टारर और गोल्डी बहल निर्देशित फिल्म द्रोण में नजर आएंगे। पिछले दिनों करण से बात हुई कि प्यार को लेकर उनका नजरिया क्या है। प्रस्तुत हैं उसके प्रमुख अंश....

आपकी नजर में प्यार क्या है?

सब कुछ प्यार ही तो है। प्यार चाहे मां से मिले, प्रेमिका से या फिर पिता से या किसी और से! हर किसी से मिलने वाला प्यार बहुत मायने रखता है, हर किसी की जिंदगी में।

आपकी नजर में प्यार के लिए कौन-सी ऋतु ठीक है?

मेरी समझ से प्यार के लिए कोई ऋतु नहीं होती। हां, बारिश में रोमांस करना, सर्दी में बीच पर जाना लोगों को जरूर अच्छा लगता है। लोग सावन को प्यार का मौसम भी कहते हैं।

प्यार को किस तरह परिभाषित किया जा सकता है?

प्यार को परिभाषित नहीं किया जा सकता, यही सच है। अगर कोई परिभाषित करता है, तो वह गलत है। उसका प्यार कभी सच्चा नहीं हो सकता। यह कहकर कि तुम्हारी नाक बहुत अच्छी है, हम प्यार नहीं, बल्कि प्यार की अवहेलना करते हैं।

सच्चा प्यार क्या है?

रिअॅल लव वही है, जिसमें कुछ पाने की चाहत जरा भी न हो। बस खोने की बात हो, यानी एकदम नि:स्वार्थ। अगर हम किसी से कुछ पाने की तमन्ना रखते हैं, तो वह सच्चा प्यार नहीं कहलाएगा!

प्यार कभी-कभी मुसीबत क्यों बन जाती है?

यदि आप सच्चे पे्रमी हैं, तो प्यार की राह में मुसीबत आ ही नहीं सकती! दरअसल, इस राह पर चलते हुए मुसीबत तब आती है, जब कोई एक गलत होता है।

एक समय में दो लोगों से प्यार करने को आप क्या कहेंगे?

मेरी समझ से इसमें कोई ऐसी बात नहीं है, जिसे गलत कहा जाए। मेरी समझ से प्यार एक स्वतंत्र भावना है, जो अचानक ही किसी को किसी की ओर खींचता है। यहां मैं प्रेमिका की बात ही नहीं कहता। मां भी अपने दो बेटों में से किसी एक को ज्यादा दुलार करती है। यह सब नेचर के तहत होता है। प्रेमी या प्रेमिका यदि यह कहें कि मैं बस तुम्हें ही चाहती हूं या चाहता हूं और वे किसी और से भी ऐसा ही रिश्ता रखते हैं, तो वह गलत है।

प्यार में पति, पैसा और मजहब क्या मायने रखता है?

सबका अलग-अलग महत्व है। हालांकि बहुत से लोग ऐसे भी हैं, जिनके जीवन में इनमें से सभी या फिर कोई एक ही मायने रखता है। जैसे- पत्नी के लिए पति, उसके बाद मजहब उसके बाद पैसा अहमियत रखता है। हालांकि इनमें वक्त के साथ बदलाव भी आ सकते हैं।

प्यार में दिल की सुननी चाहिए या दिमाग की?

दोनों की और दोनों का इस्तेमाल सही समय पर सही-तरीके से करने में ही भलाई है, वरना गड़बड़ी होते देर नहीं लगेगी!

क्या खुद से प्यार करना जरूरी है?

बहुत जरूरी है खुद से प्यार करना, क्योंकि यदि आप खुद से प्यार नहीं करेंगे, तो दूसरे से प्यार कैसे करेंगे!

प्यार से जुड़ी कोई सुहानी याद?

बहुत-सी हैं, लेकिन जो सबसे सुहानी है, मैं उसके बारे में जिक्र करना चाहूंगा। जब मैं क्लास वन में था, तब दूसरे सेक्शन की एक लड़की को मैं बहुत पसंद करता था। मेरी एक टीचर थीं, जो बहुत ही स्ट्रिक्ट थीं। वे सजा भी अजीब तरह से देती थीं। क्लास में तो मुर्गा बनाती ही थीं, दूसरे क्लास में भी ले जाकर मुर्गा बनाती थीं, ताकि हमें शर्म आए। मैं उनकी क्लास में जरूर कोई ऐसा काम कर देता था कि मुझे सजा मिले। क्लास में सजा मिलने के बाद जब वे दूसरी क्लास में मुझे मुर्गा बनाती थीं, तब मैं मुर्गा बनकर एकटक उस लड़की को देखता रहता था, जिसे मैं पसंद करता था। जब बाद में स्कूल की पढ़ाई खत्म हुई, तब मैं बहुत शॉक्ड हुआ। ऐसा इसलिए, क्योंकि हम उस लड़की से अलग हो रहे थे।

प्यार में पड़े लोगों को आपकी क्या सलाह होगी?

एक-दूसरे को इतना प्यार और सच्चा प्यार करो किदेखकर दूसरे को भी खुशी मिले। वे भी अपना प्यार लोगों में बांटें।

प्यार बिना जिंदगी?

अधूरी है। यह भी कह सकते हैं कि जिंदगी इसके बगैर कुछ भी नहीं।

प्यार के लिए संघर्ष करना चाहिए या नहीं?

मेरी समझ से बिल्कुल नहीं। प्यार की लड़ाई सिर्फ प्यार से लड़नी चाहिए।

प्रतिनिधि

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