
आशुतोष गोवारीकर निर्देशित फिल्म जोधा अकबर में शरीफुद्दीन हुसैन की दमदार भूमिका निभाकर रातोंरात सुर्खियों में आए अभिनेता निकितन धीर अपनी दूसरी फिल्म मिशन इस्तांबुल केजरिए एक बार फिर दर्शकों से रूबरू होने वाले हैं। वे इस फिल्म से भी ढेर सारी उम्मीदें लगाए बैठे हैं। मशहूर चरित्र अभिनेता पंकज धीर के सुपुत्र निकितन ने अपने फिल्मी करियर के शुरुआती सफर के अनुभव और रिलीज होने वाली फिल्म मिशन इस्तांबुल को लेकर बातचीत की..।
जोधा अकबर में शरीफुद्दीन की भूमिका निभाने का ऑफर जब मिला, तब आपकी प्रतिक्रिया क्या थी?
सच कहूं, तो बहुत एक्साइटेड इसलिए नहीं था, क्योंकि मैं पॉजिटिव मेन लीड से शुरुआत करना चाहता था। ऐसे में जब शरीफुद्दीन का नेगॅटिव रोल मुझे ऑफर हुआ, तो मैं उलझन में पड़ गया। आशुजी से मैंने वक्त मांगा और कहा कि सोचकर बताऊंगा। जब मैंने ध्यान लगाकर सोचा, तो इस बात का अहसास हुआ कि जिस स्केल पर फिल्म बन रही है, यह मेरे लिए अच्छी शुरुआत हो सकती है। फिर ऐश्वर्या और रितिक जैसे स्टार्स की मौजूदगी भी जोधा-अकबर को उल्लेखनीय बनाती है। वैसे, एक सच यह भी है कि मुझे मनचाहे ऑफर्स नहीं मिल रहे थे, इसलिए भी शरीफुद्दीन की भूमिका के लिए हां कर दी।
यानी इस तरह आपके फिल्मी करियर का आगाज हो गया?
बिल्कुल, सभी ने मेरे काम को पसंद किया। इससे बढ़कर बात मेरे लिए और क्या हो सकती है! करियर की शुरुआत अच्छी हो गई है। बस, अब उम्मीद है कि दर्शक मुझे मिशन इस्तांबुल में भी पसंद करें।
मिशन इस्तांबुल में आपकी क्या भूमिका है?
मेरे किरदार का नाम गजनी खान है, गजनी तुर्की का एक बिजनेसमैन है। उसके पिताजी बहुत धनवान हैं। बचपन से ही उसके पास दौलत और ताकत है। उसे लगता है कि दौलत एक ऐसा पुल है, जो हर दो किनारों को जोड़ सकता है।
इसका मतलब यह है कि मिशन इस्तांबुल में भी आप नेगॅटिव रोल में ही दिखेंगे?
कहा जा सकता है। मेरा किरदार ग्रे शेड लिए हुए है, लेकिन मुझे लगता है कि यह नजरिए की बात है। कई लोगों को वह नेगॅटिव लगेगा, तो कई को नहीं भी। कह सकते हैं कि गजनी खान की सोच आम इनसान से अलग है।
अपूर्व लखिया के निर्देशन में काम करने का अनुभव कैसा रहा?
अपूर्व एक ऐसे निर्देशक हैं, जो हर न्यूकमर के लिए गॉडफादर साबित होंगे। दरअसल, वे नए कलाकारों की मानसिकता को समझते हैं, उन्हें वक्त देते हैं और प्यार से हैंडल भी करते हैं। उन्होंने मेरे साथ भी बहुत प्यार से ट्रीट किया। मैं उनकी दिल से इज्जत करता हूं। भविष्य में दोबारा अपूर्व के साथ काम करने का मौका मिले या ना मिले, उनके लिए हमेशा मेरे दिल से दुआएं निकलेंगी।
जोधा अकबर और मिशन इस्तांबुल में भी आपकी एक्शन भूमिका ही है। क्या आप रोमांटिक या कॉमेडी भूमिकाओं में भी दिखेंगे?
मुझे लगता है कि ऐक्शन मेरा प्लस प्वॉइंट है। जिस तरह ईश्वर ने मुझे बनाया है, अगर मैं कॉमेडी करते हुए दिखूंगा, तो शायद दर्शक पचा नहीं पाएंगे। मुझे लगता है कि ऐक्शन मेरे डील-डॉल पर सूट करता है। इसलिए फिलहाल ऐक्शन भूमिकाएं करना ही मेरा मकसद है। दीवार और त्रिशूल में अमित जी ने जैसा रोल किया था, मैं वैसा रोल करना चाहता हूं।
मिशन इस्तांबुल के बाद क्या..?
अभी तक कोई योजना मैंने नहीं बनाई है। कई फिल्मों के ऑफर जरूर मिले हैं, लेकिन अभी अंतिम निर्णय तक नहीं पहुंचा हूं। बातें चल रही हैं।
आपके पिता पंकज धीर भी अभिनेता हैं। उनसे कितनी प्रेरणा मिली?
पिताजी ने हमेशा मुझे प्रोत्साहित और सही निर्णय लेने के लिए प्रेरित किया है। मैंने उनका संघर्ष करीब से देखा है, उससे बहुत कुछ सीखा है। मैं जानता हूं कि यहां सभी उगते सूरज को प्रणाम करते हैं। मैं प्रार्थना करता हूं कि उतार-चढ़ाव से गुजरने के बाद भी वहीं खड़ा रहूं, जहां आज हूं और अपना काम लगन से करता रहूं।
मुंबई प्रतिनिधि