
अभिनेता अर्जन बाजवा के फिल्मी करियर का आगाज काफी पहले हो चुका था फिल्म वो तेरा नाम था से, लेकिन मधुर भंडारकर की सफल फिल्म फैशन के रोल से वे पहली बार चर्चा में आए। इस फिल्म में अपने स्वाभाविक अभिनय से उन्होंने फिल्म निर्माता-निर्देशकों को लुभाया। इस फिल्म के रोल से दर्शकों के बीच उनकी अच्छी पहचान बनी। फैशन से मिली सफलता और लोकप्रियता के बाद वे अपने करियर से जुड़ा कोई भी निर्णय सोच-समझकर कर रहे हैं। अर्जन से तीन सवाल..
फैशन के बाद मिली लोकप्रियता को आप किस नजरिए से देखते हैं?
मैं मानता हूं कि अगर फिल्मी करियर के शुरुआती लमहों में आपको मधुर भंडारकर के निर्देशन में अभिनय का अवसर मिल गया, तो आपने बहुत कुछ पा लिया है। जब मधुर जी ने फैशन में मुझे मानव की भूमिका दी, तब लगा कि वे एक नए कलाकार पर भरोसा कर रहे हैं। लगा कि यह अच्छा अवसर है खुद को साबित करने का। इस प्रयास में फिल्म फैशन को मिलने वाली प्रशंसा और सफलता मेरे लिए बहुत मायने रखती है। इसमें अभिनय का अवसर पाना मेरे लिए बड़ी उपलब्धि है। मैं इस उपलब्धि को कभी नहीं भूल सकता।
अपने करियर को सही दिशा देने के लिए कोई योजना बनाई है?
फिल्मी पृष्ठभूमि से नहीं होने के कारण मुझे संघर्ष के दौर से गुजरना पड़ा। तमाम मुश्किलों के बाद मैं आज इस स्थिति में पहुंचा हूं। मैं नहीं चाहता कि दर्शक मेरी मुश्किलों और संघर्ष से प्रभावित होकर मुझे स्वीकार करें। अपनी मेहनत और प्रतिभा के बल पर दर्शकों के दिल में अपनी जगह बनाना चाहता हूं। मुख्य रूप से सार्थक भूमिकाएं निभाना चाहता हूं। नहीं चाहता कि हमेशा कॉलेज जाने वाले लड़के की ही भूमिका निभाता रहूं। अपने लुक के साथ एक्सपेरिमेंट करना चाहता हूं। आमिर खान मेरे पसंदीदा अभिनेता हैं.., उनकी तरह ही वर्सटाइल और थिंकिंग ऐक्टर बनना मेरा उद्देश्य है।
आप दक्षिण भारतीय फिल्मों में भी अभिनय कर चुके हैं। वहां और हिंदी फिल्मों के निर्माण प्रक्रिया में क्या अंतर पाते हैं?
मैंने तेलुगू फिल्मों में अभिनय किया है। तेलुगू फिल्मों में अपनी सक्रियता की वजह से मेरा हैदराबाद जाना लगा रहता है। वहां दर्शकों के बीच मेरी अच्छी पहचान भी है। दरअसल, जब मैं हिंदी फिल्मों में अपनी जमीन तलाश रहा था, उस समय मुझे साउथ से अच्छे ऑफर आए थे, जिन्हें मैंने स्वीकार कर लिया। साउथ की फिल्म इंडस्ट्री अधिक अनुशासित है। वहां शूटिंग सही समय पर शुरू होती है और सही समय पर खत्म। वैसे, इन दिनों हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में भी निर्माता-निर्देशक समय के महत्व को समझ रहे हैं। जहां तक मेरी बात है, तो हिंदी मेरी मातृभाषा है, इसलिए हिंदी फिल्मों में अभिनय करना मुझे अधिक भाता है।
-मुंबई प्रतिनिधि