पंजाब में मैं मोटी हो गई : दिया

पंजाब में मैं मोटी हो गई : दिया

अभिनेत्री दीया मिर्जा एक बार फिर चर्चा में हैं। उनकी चर्चा सोहेल खान निर्मित फिल्म किसान को लेकर है। इस फिल्म के बाद वे फिल्म एसिड फैक्टरी में भी दिखेंगी। बातचीत दीया से..

काफी समय बाद आपकी फिल्म किसान आ रही है। कहां गुम थीं आप?

मैं लगातार शूटिंग में बिजी थी। इस समय मेरी पांच-छह फिल्में फ्लोर पर हैं। हाल ही में हैदराबाद में फिल्म एसिड फैक्टरी की पंद्रह दिनों की शूटिंग कर के आई हूं। दरअसल, हड़ताल की वजह से लंबे समय से बहुत-सी फिल्में रिलीज नहीं हो सकी थीं, जिसमें मेरी फिल्म किसान भी फंसी हुई थी। मुझे उम्मीद है, अब मेरी फिल्में लगातार रिलीज होंगी।

मेल ओरिएंटेड फिल्म किसान में आपकी भूमिका कितनी अहम है?

यह सही है कि किसान एक सिख और उसके दो बेटों के इर्दगिर्द फिल्म है, लेकिन मेरे किरदार की अहमियत का अहसास लोगों को फिल्म देखने के बाद हो जाएगा। मेरे चरित्र का नाम प्रिया है। प्रिया जब शहर से गांव आती है, तो लोग उसकी रहन-सहन, सादगी से इस कदर प्रभावित होते हैं कि वह गांव में ही बस जाना चाहती है। इसमें मैं अरबाज के अपोजिट हूं।

आप मूल रूप से हैदराबाद की हैं। सिख युवती के रोल करने के लिए आपको होमवर्क भी करना पड़ा?

हां, बातचीत में पंजाबी टोन लाने के लिए डिक्शन की प्रैक्टिस की। इसके अलावा उसकी बॉडी लैंग्वेज, पहनावा और चालढाल पर भी थोड़ा होमवर्क करना पड़ा।

पंजाब में शूटिंग के कैसे अनुभव रहे?

इस फिल्म की बहुत-सी यादें मेरे मन में बैठ गई हैं। पंजाब के लोग मेहनती तो होते ही हैं, साथ ही मेहमाननवाजी में भी उनका जवाब नहीं। हम किसी खेत-खलिहान में शूट कर रहे होते थे, तो गांव की औरतें लस्सी, मक्के की रोटी, साग, राजमा, छोले आदि लेकर आ जाती थीं। मेरी चालढाल, पहनावा और पंजाबी भाषा सुनकर कहतीं, तुस्सी पंजाबण हो? मैं हंसकर कहती, नहीं, तो वे कहतीं, कोई गल नहीं, लेकिन तुस्सी सोणी हो। वहां खा-खाकर मेरा वजन इस कदर बढ़ गया कि मुंबई लौटने के बाद मुझे डायटिंग और वर्कआउट का सहारा लेना पड़ा।

दस कहानियां जैसी प्रयोगात्मक फिल्म करके पछतावा हुआ होगा। खासकर तब, जब फिल्म फ्लॉप हो गई?

नहीं। दस कहानियां की थीम अच्छी थी। संजय गुप्ता ने हमेशा कुछ अलग किस्म की फिल्में बनाई हैं। उनकी कांटे, शूटआउट ऐट लोखंडवाला और दस कहानियां सभी रुटीन से हटकर थीं। दरअसल हमारे यहां इस तरह की फिल्मों का चलन नहीं है, लेकिन अगर ऐसी कोशिशें जारी रहीं, तो फिल्म को दर्शक जरूर मिलेंगे। संजय जी की ऐसी ही एक फिल्म एसिड फैक्टरी में भी मैं खास रोल कर रही हूं।

एसिड फैक्टरी को आपकी कमबैक फिल्म के तौर पर प्रचारित किया जा रहा है?

यकीनन यह फिल्म मेरे करियर के लिए टर्निग प्वॉइंट साबित हो सकती है। हालांकि मेरे लिए मेरी हर फिल्म महत्वपूर्ण है। मैं अपनी हर फिल्म में अपना शत-प्रतिशत एफर्ट देने की कोशिश करती हूं। मेरी कुछ अच्छी फिल्में बन रही हैं। फिलहाल मुझे एक हिट की जरूरत है।

एसिड फैक्टरी में अपने किरदार के बारे में कुछ बताएं?

इसके बारे में अभी ज्यादा कुछ नहीं बता सकूंगी। सिवाय इसके कि सात बैड ब्वॉयज आफताब शिवदासानी, फरदीन खान, मनोज बाजपेयी, इरफान खान, डैनी, गुलशन ग्रोवर और डिनो मोरिया से अकेले टक्कर लेने वाली टॉम ब्वॉय लड़की प्रिया का रोल मैं कर रही हूं। इस फिल्म के लिए मैंने कई स्टंट सीन किए हैं। संजय गुप्ता ने तमाम अभिनेत्रियों का स्क्रीन टेस्ट लेने के बाद इसके लिए मेरा चुनाव किया था। उनका कहना था कि यह रोल केवल मैं ही कर सकती हूं।

इंडस्ट्री से मिले अनुभव के बारे में बताएंगी?

इस इंडस्ट्री से और यहां के लोगों से मुझे बहुत सारा प्यार और अपनापन मिला है। एक समय ऐसा जरूर आया था, जब लगातार फ्लॉप फिल्मों के बाद मैं टूट गई थी। मैंने मां से कहा था कि हम हैदराबाद वापस जाएंगे, लेकिन मेरे कुछ शुभचिंतकों ने मुझे हताशा और निराशा से लड़ने के लिए प्रोत्साहित किया। इतने अच्छे लोगों से मैं दूर कैसे हो जाती?

सलमान खान को आप अपना सबसे प्रिय दोस्त बताती हैं?

यकीनन सलमान मेरे बेस्ट फ्रेंड हैं। इस दोस्ती की एक अलग कहानी है। एक दिन मम्मी की तबियत काफी खराब हो गई थी। मैं घर में अकेली परेशान थी। पता नहीं कैसे यह खबर मेरे पड़ोस में रह रहे सलमान खान को मिल गई। वे तुरंत घर आ गए। उन्होंने कोई सवाल किए बगैर मां को अस्पताल में एडमिट कराया। बाद में डॉक्टर ने बताया कि अगर मैं आधा घंटा भी लेट होती, तो मां को बचाना मुश्किल होता। सलमान का वह उपकार मैं जीवन भर नहीं भूल सकती।

-राजेश श्रीवास्तव

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