दर्शकों को हंसाना कठिन है: अक्षय खन्ना

दर्शकों को हंसाना कठिन है: अक्षय खन्ना

अक्षय खन्ना इन दिनों अपनी नई फिल्म शॉर्टकट के प्रचार अभियान में बिजी हैं। उनसे जब मुलाकात होती, तो उनके चेहरे पर रहस्यमयी मुस्कान नजर आती है। उनसे बात होती इस सवाल के साथ कि हमारी पिछली मुलाकात रेस की रिलीज से कुछ दिन पहले हुई थी। तब से लेकर आज तक खुद में और फिल्म इंडस्ट्री में वे क्या बदलाव महसूस करते हैं? वे कहते हैं, मुझमें तो कोई खास बदलाव नहीं हुआ है। हां, हमारी इंडस्ट्री में कई बदलाव हुए हैं। स्लोडाउन के दौर से इंडस्ट्री गुजर रही है। फिल्में शुरू होने के पहले बंद हो रही हैं। मेरी दो फिल्में जो शुरू होने वाली थीं, कैंसिल हो गई। पिछले चार-पांच महीने से मैंने कोई शूटिंग नहीं की है। अगले माह मेरी नई फिल्म नो प्रॉब्लम की शूटिंग शुरू होगी। मेरे लिए तो सबसे बड़ा बदलाव यही है।

इसी बीच ए वेडनेसडे और देव डी जैसी छोटे बजट की फिल्में सफल रहीं। दर्शकों ने इन्हें पसंद किया। इस बदलाव को अक्षय किस नजरिए से देखते हैं? वे कहते हैं, दर्शकों की रुचि में इस तरह का जो बदलाव है, वह मल्टीप्लेक्स की वजह से हुआ है। यह बदलाव नहीं आया होता, तो दोनों फिल्में नहीं चलतीं। मल्टीप्लेक्स की वजह से ऐसी फिल्मों को दर्शक मिले हैं। फिल्ममेकर को भी पता चलता है कि इस तरह की फिल्मों के दर्शक हैं। यह अच्छी बात है कि अलग-अलग किस्म की फिल्में बन रही हैं और पसंद की जा रही हैं। हमारी फिल्म शॉर्टकट भी ऐसी ही फिल्म है।

बात होती है शॉर्टकट को लेकर कि क्या विशेष है इसमें? अक्षय कहते हैं, यह पिछले दो-तीन महीने से तैयार थी। प्रोड्यूसर और मल्टीप्लेक्स मालिकों के बीच सुलह नहीं हो पाने के कारण रिलीज टल गई थी। हम इसकी रिलीज को लेकर बेहद एक्साइटेड हैं। बहुत समय के बाद मुझे ऐसी फिल्म में अभिनय करने का अवसर मिला है, जिसे हिंदी मसाला फिल्म कह सकते हैं। यह बुनियादी रूप से कॉमेडी फिल्म है, लेकिन उसके साथ-साथ इसमें बहुत कुछ है। ड्रामा है, इमोशन, रोमांस है। यदि इसकी खासियत के बारे में मुझसे पूछा जाए, तो मैं कहूंगा इसकी स्क्रिप्ट। इसकी कहानी बहुत दमदार है। कॉमेडी फिल्में बनती हैं, लेकिन उनकी कहानी मीनिंगफुल नहीं होतीं। जिंदगी में बहुत बार ऐसा होता है जब हम सोचते हैं कि यह रास्ता चुनें, या वह रास्ता चुनें। इसी पर आधारित है शॉर्टकट, जो गलत रास्ता माना जाता है। इसकी कहानी दो चरित्रों की है। एक अरशद वारसी हैं, जो स्ट्रगलिंग ऐक्टर है। वह स्टार बनना चाहता है। एक मेरा चरित्र है, जो स्ट्रगलिंग राइटर-डायरेक्टर है।

अक्षय से बात होती है कि उनके अनुसार सफलता का कोई शॉर्टकट होता है? वे कहते हैं, बिल्कुल नहीं। हां, कभी ऐसा किसी के बारे में लग सकता है कि उसने सक्सेस के लिए शॉर्टकट अपनाया है। मैं मानता हूं कि लक भी एक चीज होती है। यदि लक आपके साथ है, तो कभी-कभी कुछ चीजें जल्दी मिल जाती हैं।

अनिल कपूर प्रोडक्शन की पहली फिल्म गांधी माई फादर में अक्षय ने अभिनय किया था। अब शॉर्टकट रिलीज हो रही है। उनके साथ आप एक और फिल्म नो प्रॉब्लम भी करने जा रहे हैं। अनिल कपूर के इस साथ के बारे में वे कहते हैं, मेरा जो रिश्ता है अनिल के साथ, वह एक्टर और प्रोड्यूसर का नहीं, बल्कि अच्छे दोस्त का रहा है। अनिल प्रोड्यूसर के रूप में अपनी फिल्मों में मुझे या किसी और को कभी दोस्ती की वजह से नहीं रखते। जब उन्हें लगता है कि यह एक्टर इस रोल के लिए अच्छा है, तभी वे उसे अपनी फिल्म के लिए चुनते हैं।

हास्य भूमिका को निभाने का अक्षय का अलग अंदाज होता है। उनकी नजर में दर्शकों को हंसाना कितना कठिन है? वे बताते हैं, चाहे आप कॉमेडी फिल्म बना रहे हों या रोमांटिक। फिल्में बनाने की जो प्रक्रिया है, वह बेहद सीरियस है। इसमें कोई दो राय नहीं कि कॉमेडी फिल्मों में अभिनय करना कठिन होता है। कॉमेडी कोई मजाक नहीं है। मैं मानता हूं कि एक्टर के रूप में आप कुछ भी नहीं कर सकते, जब तक वह स्क्रिप्ट में नहीं है। यहां एक्टर पूरी तरह लेखक पर निर्भर करता है।

-सौम्या अपराजिता

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