
सोनी के लोकप्रिय धारावाहिक सीआईडी ने छोटे पर्दे पर लंबा सफर तय किया है। इसे पिछले बारह वर्षो से दर्शकों द्वारा पसंद किया जा रहा है। इसमें केंद्रीय भूमिका निभा रहे शिवाजी साटम का भी उल्लेखनीय योगदान है। सीरियल में एसीपी प्रद्युम्न की भूमिका निभा रहे शिवाजी से बातचीत..
सीआईडी के साथ आपने बारह वर्षो का लंबा सफर तय किया है। यह सफर कैसा रहा?
सफर बहुत खूबसूरत रहा। बहुत कुछ सीखने को मिला। नए कलाकारों के साथ काम करने का अवसर मिला। सीआईडी ने वर्ल्ड रिकॉर्ड भी बनाया था 2006 में। एक सौ ग्यारह मिनट का हमने सिंगल शॉट लिया था। गिने-चुने लोगों को ही सीआईडी जैसे शो में हिस्सा लेने के मौके मिल पाते हैं। बारह साल के इस सफर में हमने अपने प्रोग्राम की टीआरपी को कम-ज्यादा होते देखा। यह शो तमाम उतार-चढ़ाव के बाद भी टिका हुआ है। उम्मीद है, आने वाले वर्षो तक हम लोगों का ऐसे ही मनोरंजन करते रहेंगे।
सीआईडी के साथी कलाकारों के साथ का अनुभव कैसा रहा?
इसके सेट पर हम सब कुटुंब की तरह रहते हैं। मैं खुद को उस कुटुंब का बड़ा भाई मानता हूं। कभी दूसरे कलाकारों पर हावी होने की कोशिश नहीं करता। कभी हमारी किसी से अनबन नहीं हुई है। हम मिलकर रहते हैं। बदलते वक्त के साथ हमारी टीम में नए सदस्यों का प्रवेश होता रहता है। नए सदस्यों का भी स्वागत सीआईडी के हमारे लोग पूरे जोशोखरोश से होता है।
सीआईडी को मिल रहे दर्शकों के प्यार को आप किस नजरिए से देखते हैं?
ईश्वर की कृपा है कि दर्शकों का इतना प्यार हमें मिल रहा है। बारह वर्ष पुराना हमारा रिश्ता है। दर्शकों के इस प्यार के कारण ही जब धारावाहिक सीआईडी में मेरे कैरेक्टर को अंधा दिखाया गया था, तो दर्शक बेहद नाराज हुए थे। मुझे याद है कि कई दर्शक हमें पत्र लिखकर कहते थे कि एसीपी प्रद्युम्न को अंधा क्यों बना दिया? जल्दी से उनकी आंखें वापस लाओ। एक हफ्ते के अंदर ही मेरी आंखें वापस आ गई। ज्यादातर दर्शक सीआईडी देखते हैं इसलिए हमने कुछ बातों पर विशेष ध्यान दिया है। बच्चे और स्त्रियों पर होने वाले अत्याचार से जुड़ा कोई केस हम अपने शो में नहीं दिखाते। इससे समाज पर बुरा असर पड़ता है। हमारी कोशिश होती है कि सीरियल सीआईडी को पूरा परिवार साथ बैठकर देखे।
पिछले दिनों सीआईडी गैलेंट्री अवार्ड सुर्खियों में था। इसकी वजह?
यह सीआईडी के डायरेक्टर वी पी सिंह की खूबसूरत सोच है। इसका फायदा सीआईडी को तो मिलेगा ही, साथ में दर्शक भी अपनी बहादुरी के किस्से दुनिया को बता सकेंगे। सीआईडी गैलेंट्री अवार्ड में दो श्रेणी है। पहला शारीरिक शौर्य और दूसरा सामाजिक शौर्य। सामाजिक शौर्य के अंतर्गत दहेज के खिलाफ आवाज उठाना हो सकता है। सीआईडी की तरफ से उठाया गया यह कदम आम जनता को बहादुरी के कार्य करने के लिए प्रेरित करेगा। इस अवार्ड के लिए चार जजेज की एक टीम है। इसके लिए अपनी एंट्री दर्शक सीआईडी के प्रसारण के दौरान बताए गए पते पर भेज सकते हैं। उसके बाद चैनल अपना काम करेगा।
आपको लगता है इस अवार्ड की वजह से लोगों में साहस भरे कार्य करने का हौसला बढ़ेगा?
निश्चित रूप से। दर्शकों को प्रेरणा मिलेगी। वे भविष्य में कोई भी बहादुरी का कार्य करने के दौरान हिचकेंगे नहीं। ऐसे अवार्ड दर्शकों में पॉजिटिव एनर्जी भरते हैं।