धार्मिक सीरियल हमारे प्रोडक्शन की पहचान: धीरज कुमार

धार्मिक सीरियल हमारे प्रोडक्शन की पहचान: धीरज कुमार

छोटे पर्दे के एक व्यस्ततम निर्माता के रूप में धीरज कुमार की एक अलग पहचान है। उनके बनाए सीरियल मायका, घर की लक्ष्मी बेटियां, वीरावाली, वक्त बताएगा कौन अपना, कौन पराया विभिन्न चैनलों पर आ रहे हैं। पिछले दिनों 9एक्स चैनल पर धार्मिक सीरियल जय मां वैष्णो देवी, चलो बुलावा आया है का प्रसारण शुरू हुआ है। प्रस्तुत हैं, धीरज कुमार से हुई बातचीत के प्रमुख अंश..

लंबे गैप के बाद धार्मिक सीरियल लाने की कोई खास वजह?

इसकी अहम वजह है दर्शकों की मांग। आज लंबे अरसे के बाद छोटे पर्दे पर डिवोशनल और माइथोलॉजिकल कार्यक्रमों का दौर लौटा है। चैनलों पर ऐसे कई कार्यक्रम आ रहे हैं और लोग इन्हें देख भी रहे हैं। वैसे भी जब कोई चीज लंबे गैप के बाद आती है, तो लोगों की उसके प्रति जिज्ञासा और बढ़ जाती है। यही बात टीवी कार्यक्रमों के साथ भी लागू होती है। यहां एक बात और कहना चाहूंगा कि समय बदलता रहता है, लोग आते-जाते रहते हैं, लेकिन ईश्वरीय सत्ता और देवी-देवताओं का अस्तित्व हमेशा बरकरार रहता है।

कहीं आपने रामायण की लोकप्रियता से प्रभावित होकर तो इसे नहीं बनाया?

ऐसी बात नहीं है। धार्मिक सीरियल हमारे प्रोडक्शन हाउस की खासियत हैं। हम 1996 से ही ऐसे सीरियल बना रहे हैं। हां, बीच में हमने बहू बेटी, मायका, बेटियां.., वीरावाली जैसे धारावाहिक भी बनाए, लेकिन जब धार्मिक सीरियल की दर्शकता बढ़ी, तो एक बार फिर हम ऐसे सीरियल की ओर लौटे हैं।

जय मां वैष्णो देवी.. के बारे में कुछ बताएं?

इस सीरियल में मां वैष्णो देवी की उत्पत्ति से लेकर उनसे जुड़ी तमाम कहानी और किंवदंतियों का समावेश है। इसमें देवी की शक्ति और चमत्कारों के साथ उनके भक्तों की कहानियों को भी उचित स्थान दिया गया है।

धार्मिक सीरियल और आप एक-दूसरे के पर्याय जैसे बन गए हैं। कितना कठिन या आसान है आपके लिए ऐसे सीरियल बनाना?

सच बताऊं, तो अपने देश में धार्मिक सीरियल बनाना किसी भी रूप में आसान नहीं है। चूंकि अपना देश धर्मप्रधान है, सो लोगों की आस्था देवी-देवताओं में खूब है। ऐसे में आप झटके से कोई चीज नहीं बना सकते! काफी मेहनत करनी पड़ती है।

शूटिंग के दौरान कोई ऐसी घटना, जिसे आप बताना चाहें? वैसे तो छोटी-मोटी घटनाएं रोज घटती रहती हैं, लेकिन यहां एक चमत्कार की बात बताना चाहूंगा। हुआ यह कि यूनिट के लोगों के साथ कलाकारों को भी हिदायत दी गई थी कि जब तक शूटिंग चलेगी, कोई मांसाहारी भोजन नहीं करेगा। सब लोग इसका पालन भी कर रहे थे, लेकिन वैष्णो देवी की भूमिका कर रहीं रूपा दत्ता रोज शाकाहारी भोजन करके ऊब गई थीं। बंगाली होने के कारण उन्होंने मांसाहार की व्यवस्था करने के लिए कहा। हमने साफ कह दिया कि सेट पर ऐसा संभव नहीं है। यदि वे चाहें, तो किसी होटल से खाना खाकर आ जाएं। उसके बाद वे कहीं से अंडा खाकर आ गई, लेकिन शूटिंग नहीं हो पाई। सब कुछ सही होने के बावजूद न तो हमारे कैमरा काम कर रहा था, न ही लाइट आ रही थी। बाद में हमने रूपा के साथ मंदिर जाकर माफी मांगी। उसके बाद सभी उपकरण काम करने लगे।

पहले आप दूरदर्शन के लिए ही सीरियल बनाते थे, लेकिन अब सेटेलाइट चैनलों के लिए भी काम कर रहे हैं। क्यों?

ऐसी बात नहीं है, हम आज भी दूरदर्शन से जुड़े हुए हैं। दूरदर्शन पर हमारा आज भी एक सीरियल सौतेला चल रहा है। वैसे, बड़े शहरी लोग आमतौर पर दूरदर्शन नहीं देखते, जबकि सेटेलाइट चैनल शहरी दर्शकों पर ही फोकस करते हैं। ऐसे में हमें जो कोई पहले मौका देता है, उसी चैनल के साथ काम करने लगते हैं।

-एस. नूपुर

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