[सुरेंद्र कुमार वर्मा]
एक टूर्नामेंट खत्म हुआ नहीं कि दूसरे की बारी आ जाती है। यह सही है कि लगातार क्रिकेट होने से क्रिकेट बोर्डो को आर्थिक रूप से काफी फायदा होता है। लेकिन क्रिकेट की बहुतायत से कहीं न कहीं खेलप्रेमी भी इसके प्रति उदासीन होने लगते हैं। आखिरी हर नए टूर्नामेंट या सीरीज के लिए नए दर्शक तो आते नहीं वहीं दर्शक होते हैं जो पिछले मुकाबलों में थे वहीं आज भी हैं।
एक के बाद एक टूर्नामेंट के आयोजनों से न सिर्फ खिलाड़ी थकते हैं बल्कि क्रिकेटप्रेमी भी बोर हो जाते हैं। बीसीसीआई की सबसे सफल इंडियन प्रीमियर लीग [आईपीएल] के बाद हालिया संपन्न ट्वंटी-20 में ही अंतरराष्ट्रीय स्तर के टूर्नामेंट चैंपियंस लीग के दौरान स्टेडियम में खाली पड़े सीटें बहुत कुछ कह गई हैं। आयोजकों को इस बात का गुमान था कि आईपीएल की तरह चैंपियंस लीग में भी दर्शकों का भरमार होगा। आईपीएल के पहले संस्करण में खचाखच भरे स्टेडियमों ने न सिर्फ बीसीसीआई को बल्कि क्रिकेट खेलने वाले अन्य देशों को रोमांचित कर दिया था। इसी उत्साह को भुनाने के लिए बीसीसीआई ने चैंपियंस लीग शुरू कर दी लेकिन पिछले साल मुंबई में आतंकी हमलों के कारण इसे स्थगित कर दिया गया था जो इस साल अक्टूबर में खेला गया। लेकिन इस बार गोटी सही नहीं बैठी और कई मुकाबलों में स्टेडियम खाली नजर आए। दक्षिण अफ्रीका में चैंपियंस ट्राफी खत्म होने के तीन दिन बाद ही भारत में लीग की शुरुआत हो गई।
इधर चैंपियंस लीग खत्म भी नहीं हुई कि वनडे सीरीज खेलने आस्ट्रेलियाई टीम हिंदुस्तान की धरती पर कदम रख चुकी थी। लीग खत्म होने के एक दिन बाद ही वनडे सीरीज शुरू हो गई। कंगारू टीम में छह खिलाड़ी अपनी-अपनी टीमों के लिए पिछले 15 दिनों से लीग में खेल रहे थे इसलिए वे खिलाड़ी थके हुए नजर आए और टीम के साथ शुरुआती अभ्यास सत्र में भाग भी नहीं ले सके। कंगारू कप्तान रिकी पोंटिंग व्यस्त कार्यक्रम से पहले ही अपनी नाराजगी जता चुके हैं। इसका कारण कई खिलाडि़यों का देर से उनकी टीम से जुड़ना था। उनके अनुसार सात मैचों की वनडे सीरीज काफी लंबी और थकाऊ होती है इसे बेस्ट आफ फाइव होना चाहिए था।
पोंटिंग लगातार क्रिकेट और लंबे दौरों के कारण पहले भी अप्रत्यक्ष रूप से नाराजगी जताते रहे हैं। सिर्फ आस्ट्रेलिया ही नहीं भारत, इंग्लैंड और न्यूजीलैंड समेत दुनिया के टेस्ट क्रिकेट खेलने वाली टीमों के खिलाड़ी व्यस्त कार्यक्रमों के कारण लगातार चोटिल हो रहे हैं। लेकिन क्रिकेट बोर्डो को कमाई के आगे कुछ भी सुझाई नहीं दे रहा है। पोंटिंग के अनुसार जैसे-जैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्रिकेट की अधिकता हो रही है उससे खिलाडि़यों के चोटिल होने की संभावना ज्यादा बढ़ती जा रही है। पोंटिंग ने अत्यधिक क्रिकेट से बचने के लिए आईपीएल-टू और इंग्लैंड के खिलाफ शुरुआती वनडे सीरीज में नहीं खेलने का फैसला किया था। हालांकि पोंटिंग बड़े क्रिकेटर हैं वह अपनी ईच्छानुसार क्रिकेट से ब्रेक ले सकते हैं लेकिन यह स्थिति सभी के साथ नहीं होती है खासतौर से उभरते सितारों के लिए।
इस मामले में भारतीय टीम की हालत ज्यादा खराब है क्योंकि क्रिकेट जगत में सबसे ज्यादा कमाई यहीं पर होती है। सभी बोर्ड भारत में खेलकर अपने बैंक बैलेंस में इजाफा करना चाहते हैं। एक समय क्रिकेट के मैदान पर भारत-पाकिस्तान के बीच कड़ी प्रतिद्वंद्विता थी जिसका दोनों बोर्डो ने आर्थिक रूप से बहुत फायदा उठाया। लेकिन 11 महीने पहले मुंबई में हुए आतंकवादी हमलों के बाद इन देशों के बीच क्रिकेट रिश्ते ठंडे पड़ गए हैं। वहीं पिछले कुछ सालों में भारत और आस्ट्रेलिया के बीच मैदान में प्रतिद्वंद्विता काफी बढ़ी है जिसका दोनों टीमों के बोर्डो ने दोहन करने का फैसला लिया है। बीसीसीआई और क्रिकेट आस्ट्रेलिया [सीए] के बीच हुए नए करार के तहत भारतीय टीम अगले छह सालों में चार बार आस्ट्रेलिया का दौरा करेगी जबकि कंगारू टीम हर साल भारत आएगी। आस्ट्रेलिया के साथ जारी वनडे सीरीज खत्म होने के हफ्ते भर में ही श्रीलंकाई टीम भारत के सरजमीं पर कदम रख देगी और यह दौरा 28 दिसंबर को जाकर खत्म होगा।
ट्वंटी-20 क्रिकेट के जन्म के बाद भारतीय खिलाडि़यों को फुर्सत नहीं मिलने वाली है एक के बाद सीरीज के अलावा डेढ़ महीने चलने वाली आईपीएल और चैंपियंस लीग हर साल उनका सिरदर्द बढ़ाता रहेगा। वहीं क्रिकेट की अंतरराष्ट्रीय नियामक संस्था आईसीसी के कुछ प्रमुख मुकाबले हैं जो लगभग हर साल किसी न किसी रूप में होते ही हैं। भारतीय टीम को कई सालों के बाद इस साल के मध्य में लगभग दो महीने का आराम मिला था। लेकिन इतना बड़ा आराम टीम को अब कब मिलेगा इसका कोई जवाब न तो खिलाड़ी ही दे सकते हैं और न ही इनके आका।
बिना ब्रेक लिए क्रिकेट खेलने से न सिर्फ खिलाड़ी थकते हैं बल्कि दर्शक भी ऊब जाते हैं। लगातार क्रिकेट किसी भी बड़ी सीरीज या टूर्नामेंट में दर्शकों को स्टेडियम में खींच पाने में असमर्थ हो जाते हैं क्योंकि एक समय के बाद इसमें बोरियत आने लगती है। भले ही इनमें खूब ग्लैमर व तड़क-भड़क का मसाला क्यों न डाल दिया जाए। किसी भी चीज की अधिकता उसके प्रति नफरत का भाव पैदा कर देता है। और यह नफरत बहुत खतरनाक भी होता है क्योंकि इस स्थिति में एक बार नफरत होने पर फिर उसके प्रति लगाव हो इसकी संभावना कम हो जाती है। अत: संचालकों को चाहिए कि वे क्रिकेट को सोने का अंडा देने वाली मुर्गी समझना बंद करें। इसके विश्वव्यापी फैलाव पर ज्यादा ध्यान दें। इस खेल में और नए देश व नए खिलाड़ी जोड़े जिससे की मुकाबले में फुटबाल की तरह नवीनता और रोचकता आए।
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