

(अनिल कुंबले की कलम से)
गत सप्ताह टीम के लिहाज से कई बातें घटित हुई और विशेषकर यह खुशनुमा समय नहीं है। कई अन्य खिलाडि़यों की ओर से कहने के लिए यहां कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण बात है। वह यह है कि जो कुछ भी जयपुर में हुआ, उससे हम स्तब्ध और दुखी हैं। आतंकवादी हमला हमेशा ही समझ से परे और दुखद होता है। उन्हें किसी भी पहलू से सही नहीं ठहराया जा सकता। और मेरी संवेदनाएं उन सभी लोगों और उनके परिजनों के साथ हैं, जो इस हादसे से गुजरे हैं। वास्तव में, जिंदगी फिर से कभी भी ऐसी नहीं होगी।
रॉयल चैलेंजर्स और पिछले कुछ दिनों की घटनाओं पर आते हुए मैं समझता हूं कि अब तक के परिणाम से हर कोई निराश है। बतौर खिलाड़ी और पेशेवर क्रिकेटर होने के नाते हम भी बहुत ज्यादा निराश हैं। हम जो भी मैच खेलते हैं, वे सभी मुकाबले जीतना चाहते हैं। समस्या क्या है? वास्तव में, हमें बिल्कुल भी लय प्राप्त नहीं हुई है। और जब भी हमने जब भी थोड़ी बहुत लय हासिल की, तो तभी कुछ न कुछ घटित हुआ। पिछले मैच में भी मिस्बाह उल हक ने शानदार शुरुआत की, लेकिन वह असामान्य ढंग से आउट हो गए। हालांकि महत्वपूर्ण यह है कि ऐसे में आपको ज्यादा से ज्यादा समर्थन और सहयोग की जरूरत होती है। आपको इर्द-गिर्द ऐसे लोगों की जरूरत होती है, जो यह जानते हों कि कुल मिलाकर खेल क्या है। ऐसे लोगों कि जो यह जानें कि कोई भी मैदान पर हारने के लिए नहीं उतरता। दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि हमेशा ही हर शख्स कप्तान की ओर उंगली उठाना शुरू कर देता है। ऐसे में अन्य बातों से ज्यादा महत्वपूर्ण है कि टीम से जुड़ेलोग यह कहें कि हमें आपमें और आपकी टीम में भरोसा है। इस तरह के हालात में यही सबसे महत्वपूर्ण बात है। मैं समझता हूं कि यहां कार्पोरेट लुक है। मगर मैं यह भी कहूंगा कि दिन की समाप्ति पर यह क्रिकेट मैच ही है। और कोई भी क्रिकेटर हारना नहीं चाहता।
(ह्वाकआई कम्युनिकेशंस)