कोटला पर बल्लेबाजों की होगी असल परीक्षा   
 
 

[अनिल कुंबले की कलम से]

पहले दो वनडे मैचों में खूब रन बनने से सभी को काफी खुशी हुई होगी। मगर अब तीसरे वनडे मैच में शनिवार को फिरोजशाह कोटला मैदान पर शायद रनों की वैसी बरसात देखने को नहीं मिलेगी। अगर यहां की पिच पहले जैसी रही, तो दिल्ली के इस मैदान पर बल्लेबाजों की असल परीक्षा होगी।

ट्वंटी-20 चैंपियंस लीग के दौरान भी बल्लेबाजों को यहां रन बनाने में काफी दिक्कत हुई थी। अत: इस तरह के विकेट पर टास जीतने वाली टीम पहले बल्लेबाजी करना पसंद करेगी। इसके अलावा ओस की बूंदे भी कुछ कमाल कर सकती है, क्योंकि ओस गिरने के बाद गेंद बड़ी आसानी से बल्ले पर आती है। ऐसे में बल्लेबाजों को रन बनाने में काफी सहूलियत होगी। टीम इंडिया रणनीति बनाने में अपने स्थानीय खिलाडि़यों की पूरी मदद लेगी। मौजूदा टीम में वीरेंद्र सहवाग, गौतम गंभीर, आशीष नेहरा, ईशांत और विराट कोहली शामिल हैं। ऐसे में टीम इंडिया इन धुरंधरों के अनुभवों का खूब फायदा उठाएगी। ये धाकड़ खिलाड़ी यहां बहुत मैच खेल चुके हैं इसलिए वे यहां की स्थिति से पूरी तरह वाकिफ हैं।

दूसरी ओर आस्ट्रेलिया टीम को ब्रेट ली व बोलिंगर से मदद मिल सकती है, क्योंकि ये दोनों खिलाड़ी ट्वंटी-20 चैंपियंस लीग के कई मैच खेले हैं। इसके साथ ही कैमरून व्हाइट को भी इस लीग में खेलने का मौका मिला था इसलिए वे भी कंगारू टीम को उपयोगी राय दे सकते हैं। जहां तक मेरी राय है तो यहां की विकेट पहले की तरह इस बार भी बल्लेबाजों की मददगार होगी। नागपुर की पिच वाकई में बेहतरीन थी, जहां भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धौनी खूब फायदा उठाने में कामयाब रहे। मैं पहले से कहता रहा हूं कि सामने से नेतृत्व प्रदान करने से अच्छा कुछ भी नहीं होता और धौनी ने यह कर दिखाया। उन्होंने बुधवार को अपनी पारी को बड़ी बारीकी से सजाया और मैदान के चारों ओर शानदार शाट खेले। आस्ट्रेलियाई कप्तान रिकी पोंटिंग का टास जीतकर क्षेत्ररक्षण का फैसला काफी चौंकाने वाला था।

भारतीय कप्तान धौनी को कोई शिकायत नहीं हुई, क्योंकि उन्हें बड़ा स्कोर बनाने में गंभीर व सुरेश रैना से काफी मदद मिली। आस्ट्रेलियाई टीम बल्लेबाजी करने से पहले ही मैच से बाहर हो गई थी, क्योंकि उसके सामने करीब-करीब एक असंभव लक्ष्य था। इसके साथ भारतीय गेंदबाजों ने यहां शुरुआत में आस्ट्रेलिया को बैकफुट पर ला दिया था। यदि कोटला का मैदान गेंदबाजों की मददगार साबित होती है तो ऐसे में गेंदबाजों पर अतिरिक्त दबाव होगा।

[ह्वाकआई कम्युनिकेशंस]

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