[सुनील गावस्कर की कलम से]
जब महेंद्र सिंह धौनी पहली बार भारतीय टीम में आए थे, तो उनकी पहचान बड़े हिटर के रूप में थी। उनमें ऐसी क्षमता थी कि वे ज्यादातर समय जब चाहते थे छक्का लगा देते थे। जिस तरह से वे तेज गेंदबाजों की धज्जियां उड़ाते थे, उसके बारे में जितना कहा जाए उतना कम है।
शोएब अख्तर ने शार्ट गेंदों से डराने के साथ-साथ न केवल उन्हें घूरा बल्कि पंजाबी के कुछ चुनिंदा शब्दों से भी उनका ध्यान बंटाने की कोशिश की। मगर यह क्या, जितनी तेजी से वे गेंद डालते उससे भी ज्यादा तेजी से उनके पास वापस आती। सच्चाई यह है कि जिस अंदाज से गेंद फेंकी जाती उसी अंदाज में बल्ले से उसे जवाब मिलता और वह गेंदबाज के ऊपर से लहराती हुई जाती। जल्द ही अख्तर नीचे झुककर खुद को बचाते-बचाते थक गए और यह समझ में भी आता है। कारण, गेंदबाज तो हेलमेट नहीं पहनते।
नागपुर और दिल्ली में भी कुछ आस्ट्रेलियाई गेंदबाजों को इसी तरह का अहसास हुआ होगा। बस फर्क इतना था कि अख्तर के पास गेंद जितनी ज्यादा बार वापस आती थी उतनी ज्यादा बार यहां नहीं आई। हां, धौनी ने अपना अंदाज बदला है और यही चीज है जो भारतीय टीम को चाहिए। फिर भले ही क्रिकेट प्रेमी माही के इस अंदाज से असहमत ही क्यों न हों। सौरव गांगुली के संन्यास और राहुल द्रविड़ को टीम के बाहर किए जाने के बाद भारतीय बल्लेबाजी क्रम में एक ऐसे बल्लेबाज की जरूरत दिखी जो जरूरत पड़ने पर रन गति बढ़ा सके और धौनी यह काम बखूबी कर रहे हैं। उन्होंने नागपुर के बाद दिल्ली में भी ऐसा ही किया। इस समय सबसे ज्यादा जरूरत थी साझेदारी खड़ी करने और पारी को आगे बढ़ाने की। दोनों बार उनके प्रयास व उनकी साझेदारी ने भारत को मैच जिताया।
अगर देश के क्रिकेट प्रेमियों को वाकई जीत चाहिए तो उन्हें धौनी के नए अंदाज को स्वीकार करना ही होगा। वे आजकल धमाकाई अंदाज में न खेलकर पूरी तरह से रणनीति बनाकर खेलते हैं। अगर गौतम गंभीर व सुरेश रैना नागपुर में उनके साझीदार थे तो दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान में यह काम युवराज सिंह ने किया। उन्होंने आस्ट्रेलियाइयों से मैच छीन लिया। वैसे मेहमान टीम ने सम्मानजनक स्कोर बनाया। धौनी के पास जो विकल्प थे उसमें यह ऐसा स्कोर नहीं था कि भारत को रक्षण करने में परेशानी होती। भारतीय कप्तान ने कामचलाऊ गेंदबाजों युवी और रैना का बखूबी इस्तेमाल किया। इन दोनों ने पांचवें गेंदबाज की कमी नहीं खलने दी। उन्होंने युवा रविंद्र जडेजा को काफी ओवर दिए और इस खब्बू गेंदबाज का विश्वास बढ़ता जा रहा है।
पहला मैच हारने के बाद क्षेत्ररक्षण में काफी सुधार दिखाई दिया। आस्ट्रेलिया को यहां से सीरीज जीतनी है तो उसे अपने खेल का स्तर उठाना होगा। वह ऐसा करने में सफल रहते हैं तो किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए। वह विश्व चैंपियन हैं और उन्हें पता है कि मुश्किल परिस्थितियों से कैसे वापसी की जाती है। यही वजह है कि अगले कुछ दिनों में हमें कांटे का क्रिकेट देखने को मिल सकता है।
[पीएमजी]
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