[रवि शास्त्री की कलम से]
यह सचिन तेंदुलकर की सर्वश्रेष्ठ और कई मायनों में सबसे दुखद पारी थी। इस शानदार पारी का ऐसा अंत। भगवान ऐसा कैसे कर सकता है। मास्टर बल्लेबाज के साथी उनकी इस लाजवाब बल्लेबाजी से क्यों प्रेरित नहीं हुए। जबकि स्टेडियम में मौजूद हजारों और टेलीविजन पर मैच देख रहे करोड़ों क्रिकेट प्रेमी सचिन की पारी को देखकर उनके जज्बे को सलाम कर रहे थे।
वास्तव में यह सचिन की शानदार पारी ही थी, जिसने साथी खिलाडि़यों के खराब प्रदर्शन को दबा दिया। इसमें कैच छोड़ना और लचर गेंदबाजी भी शामिल है। हैदराबाद एक दिवसीय मुकाबले में यह रन मशीन इस रफ्तार से रन उगल रही थी, जिस पर विश्वास करना सभी के लिए आसान नहीं था। मत भूलिए कि वह 36 साल के हैं, लेकिन इस पारी के बाद हर कोई कह सकता है कि बल्लेबाजी के दौरान ऐसा लगा रहा था जैसे 16-17 साल के सचिन गेंदबाजों की बखिया उधेड़ रहे हैं। मगर अंत में बाकी टीम ने उन्हें नीचा दिखाया।
रविंद्र जडेजा अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी जमीन तलाश रहे हैं और उनके बाद अन्य सभी गेंदबाज थे। इस सीरीज में भारत दो करीबी मैच हारा, जिनमें उसे जीतना चाहिए था। अब सीरीज जीतने की भारत की उम्मीदें जिंदा रखने के लिए तेंदुलकर को एक और असाधारण पारी खेलनी होगी। यहां बात केवल मानसिक मजबूती की है, जिसमें टीम इंडिया आस्ट्रेलियाइयों के सामने कहीं नहीं ठहरती। अगर तेंदुलकर भारतीय टीम को प्रेरित नहीं कर सके तो उसे मेहमान टीम से प्रेरणा लेनी चाहिए।
सीरीज के आधे रास्ते में ही उनके कई अहम खिलाड़ी चोटिल हो चुके थे, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। बावजूद इसके याद कीजिए हैदराबाद वनडे में भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धौनी का शानदार शाट कैसे एक लाजवाब कैच में तब्दील हो गया। और कैसे अपना पहला ही मैच खेल रहे क्लिंट मैकाय ने तेंदुलकर का विकेट लेने सहित कितनी धारदार गेंदबाजी की। कितना फर्क है कि आस्ट्रेलियाई टीम में हर खिलाड़ी एक-दूसरे की ढाल बनता है और भारत में अंत तक तेंदुलकर का साथ देने वाला कोई खिलाड़ी नहीं मिलता। जो भी हो, सचिन समय और हालात से परे महान बल्लेबाज हैं जो अपनी साधारण सी जिंदगी जीने वाले करोड़ों लोगों को भी प्रेरणा से भर देते हैं।
[टीसीएम]
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