(अनिल कुंबले की कलम से)
यात्रा करना एक क्रिकेटर की जिंदगी का अभिन्न हिस्सा है। मगर एक दिन-रात्रि का मैच खेलने के बाद देश के दूसरे हिस्से में दिन का मैच खेलना कभी भी आसान नहीं होता। हैदराबाद में भारतीयों ने जीत के लिए सब कुछ किया, लेकिन अंत में भारत हारने वाली टीम थी।
गुवाहाटी में मैच सुबह शुरू होगा, लेकिन 8:30 बजे कहीं से भी मैच शुरू करने का उचित समय नहीं है और इस पर ध्यान दिए जाने की जरूरत है। वहां सूरज जल्दी छिप जाता है। ऐसे में मैच में डकवर्थ-लुइस प्रणाली के प्रयोग से इन्कार नहीं किया जा सकता, जो अहम भूमिका निभा सकती है। इस स्थिति में कप्तान हमेशा मुश्किल में होते हैं। उन्हें यह निर्णय लेने में परेशानी होती है कि टास जीतने के बाद पहले बल्लेबाजी करें या गेंदबाजी। मगर एक बात जो मैं कहना चाहूंगा कि गुवाहाटी के दर्शक अपने चहेते खिलाडि़यों के लिए दीवाने होते हैं। वे टीम होटल के बाहर घंटों खड़े रहते हैं और खिलाडि़यों के दीदार का इंतजार करते हैं। जैसे ही आप अपने कमरों से पर्दे हटाते हैं आपको शुभकामनाएं देते प्रशंसकों का शोर गुंजायमान हो उठता है। यहां बता दूं कि सचिन तेंदुलकर को चाहने वाले सबसे ज्यादा होते हैं।
लगभग 20 सालों से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पांव जमाए सचिन की हैदराबाद में खेली गई उनकी सर्वश्रेष्ठ पारियों में से एक इस बल्लेबाज की महानता की गवाह भर है। इतने लंबे समय तक उनके साथ और अब टीवी पर उन्हें मैंने कभी इतना शानदार खेलते नहीं देखा, जितना कि वे अब खेल रहे हैं। उनके आउट होने के बावजूद हालांकि भारत को वह मैच जीतना चाहिए था। कप्तान महेंद्र सिंह धौनी ने रविंदर जडेजा से पहले हरभजन सिंह को भेजकर जता दिया था कि बाएं हाथ का यह बल्लेबाज अपने प्रदर्शन से टीम प्रबंधन को प्रभावित नहीं कर पाया है। मैं पहले भी कहता रहा हूं कि जडेजा के स्थान पर अमित मिश्रा बेहतर विकल्प हैं, जो मध्यक्रम में आक्रामक गेंदबाजी कर आस्ट्रेलियाइयों के लिए परेशानी खड़ी कर सकते हैं। धौनी के धुरंधरों को अब गुवाहाटी में जीत दर्ज कर मुंबई में निर्णायक मुकाबला खेलने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी।
[ह्वाकआई कम्युनिकेशंस]
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