वनडे क्रिकेट के अस्तित्व पर संकट?   
 
 

[सुरेंद्र कुमार वर्मा]

ज्यों-ज्यों फटाफट क्रिकेट खेल प्रेमियों के बीच अपनी पकड़ बनाता जा रहा है 50-50 ओवर के वनडे क्रिकेट के अस्तित्व पर संकट गहराता जा रहा है। इंग्लैंड और वेल्स क्रिकेट बोर्ड [ईसीबी] ने पिछले दिनों चौंकाते हुए घोषणा की कि अगले साल से घरेलू सत्र में एकदिवसीय क्रिकेट नहीं खेला जाएगा। दूसरी ओर विश्व में क्रिकेट की सर्वोच्च नियामक संस्था अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद [आईसीसी] क्रिकेट की तीनों विधाओं टेस्ट, वनडे और ट्वंटी-20 को एक साथ बनाए रखने की कवायद में जुटा हुआ है।

ट्वंटी-20 की शुरुआत में लग रहा था कि टेस्ट क्रिकेट खत्म हो जाएगा और सिर्फ वनडे व टी-20 ही वजूद में रहेंगे। पर अब लग रहा है कि पूरी तरह से संकट वनडे पर आ गया है। 133 साल पुराना टेस्ट [1876-77 में आस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच खेला गया पहला टेस्ट] तो क्रिकेट का क्लासिकल खेल है हर खेलप्रेमी पांच दिवसीय मुकाबले को बनाए रखने के पक्ष में हैं। भले ही टेस्ट मुकाबलों के दौरान स्टेडियम में पहले की तरह दर्शकों की भारी भीड़ न जुड़ती हो लेकिन हर कोई मैच के बारे में जानकारी रखना पसंद करता है। और हर दिन के मुख्य क्षण को टीवी पर देख मैच की स्थिति जान सकता है। वहीं आईसीसी भी टेस्ट का महत्व नहीं घटने देना चाहती इसीलिए क्रेज बनाए रखने के लिए उसने पांच दिन से घटाकर इसे चार दिन का मुकाबला बनाने पर विचार शुरू कर दिया है। टेस्ट क्रिकेट का क्रेज आज भी इस कदर है कि हर युवा क्रिकेटर अपनी-अपनी राष्ट्रीय टीम का टेस्ट कैप पहनने का ख्वाब देखता है।

लंबे प्रयासों के बाद 1971 में पहला एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैच खेल गया। इसके चार साल बाद 1975 में इंग्लैंड में ही पहला विश्व कप क्रिकेट आयोजित किया गया। और अब तक नौ विश्व कप हो चुके हैं और दसवां विश्व कप 2011 में भारतीय उपमहाद्वीप में होने वाला है। टी-20 के आगमन से पूर्व वनडे का रौनक कायम था। वनडे मुकाबले के बदौलत ही भारतीय क्रिकेट बोर्ड [बीसीसीआई] दुनिया का सबसे रईस बोर्ड बन गया और आज वह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपने रुतबे का एहसास कराता रहा है।

ईसीबी ने अगले विश्व कप के बाद वनडे क्रिकेट की समीक्षा करने की बात कही है हालांकि आईसीसी का पूरा जोर तीनों विधाओं को बचाए रखने पर है। आईसीसी के भविष्य दौरे कार्यक्रम [एफटीपी] में तीनों को शामिल किया गया है। पर टी-20 की तेजी से बढ़ती लोकप्रियता वनडे के लिए खतरे का कारक बनती जा रही है। इंग्लैंड के इस पहल के बाद अन्य क्रिकेट बोर्ड भी ऐसा फैसला कर सकते हैं क्योंकि जहां एक वनडे मैच में पूरा दिन [आठ-नौ घंटा] बर्बाद हो जाता है वहीं टी-20 महज तीन घंटे में ही संपन्न हो जाता है वह भी ग्लैमर व भरपूर मनोरंजन के साथ।

हकीकत यह भी है जबसे क्रिकेटप्रेमियों को ट्वंटी-20 का चस्का लगा है उन्हें अब वनडे का स्वाद फीका लगने लगा है। 50-50 ओवर के मुकाबले के दौरान दर्शकों को लगता है कि मैच तो खत्म ही नहीं हो रहा। महान खिलाड़ी शेन वार्न समेत दुनिया के कई पूर्व क्रिकेटर वनडे को समाप्त करने का सुझाव दे चुके हैं। खेल के स्पांसर भी टी-20 के आगे वनडे पर पैसा खर्च करने से कतरा सकते हैं।

वनडे क्रिकेट पर धीरे ही सही पर हर तरफ से संकट के बादल घिरने लगे हैं हालांकि इसकी नियामक संस्था इतनी आसानी से इसे खत्म नहीं होने देगी। लेकिन जिस तरह से तीन-चार साल पहले बीसीसीआई टी-20 क्रिकेट की प्रखर आलोचक थी लेकिन टी-20 में पहला विश्व चैंपियन बनने के बाद उसका सुर पूरी तरह से बदल गया और अकूत संपत्ति और ग्लैमर से भरपूर आईपीएल को दुनिया के सामने प्रस्तुत कर दिया। दुनियाभर के खिलाड़ी इसके आकर्षण के पीछे आंख बंद कर दौड़ पड़े। पहली आईपीएल की अपार सफलता के बाद दुनिया के अन्य क्रिकेट बोर्डो ने भी घरेलू लीग कराना शुरू कर दिया। जहां से बेहिसाब पैसा आता हो उसे ही हर कोई पुजना चाहेगा। एक समय वनडे क्रिकेट जगत का सबसे आकर्षक खेल हुआ करता था। भारत समेत कई देश ज्यादा धन कमाने के चक्कर में लगातार वनडे सीरीज व टूर्नामेंट का आयोजन कराने लगे। वहीं स्थिति अब टी-20 के साथ हो गया है।

हर खेल का अपना क्रेज होता है लेकिन आज के समय में जहां हर चीज पैसों से देखी जाती है वहां संकट में पड़े वनडे के अस्तित्व पर सवालिया निशान लग ही जाता है। वनडे का क्या होगा यह तो भविष्य के गर्त में छिपा है लेकिन यह तो तय है इसके आसार अच्छे नहीं हैं।

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