

विश्व क्रिकेट में अपनी स्पीड से सुर्खियां बटोरने वाले शोएब अख्तर पर पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने पांच साल की पाबंदी लगा दी है। रावलपिंडी एक्सप्रेस के नाम से मशहूर शोएब का पूरा कैरियर विवादों से घिरा रहा।
कभी चोट, कभी साथी खिलाडि़यों से झड़प और कभी डोपिंग विवाद ने शोएब के कैरियर को प्रभावित किया। उन्होंने अपने नौ साल के कैरियर में 46 टेस्ट मैच में 178 विकेट और 138 वनडे मैचों में 219 विकेट हासिल किए। कैरियर की शुरुआत में शानदार प्रदर्शन करने वाले शोएब को पहले घुटने और टखने की चोट ने परेशान किया। फिर उसके बाद उनके एक्शन पर अंगुलियां उठने लगीं। विवादों का सिलसिला यहीं खत्म नहीं हुआ उन्हें डोपिंग के कारण दो साल के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया। हालांकि वह बाद में बरी हो गए। उसके बाद साथी खिलाड़ी मोहम्मद आसिफ की जांघ पर बल्ला मारने के बाद उनकी छवि एक बिगड़ैल गेंदबाज के रूप में बन गई। विवाद उनके कैरियर का अहम हिस्सा बन गए। आइए डालते हैं रावलपिंडी एक्सप्रेस के विवादों से भरे सफर पर नजर-
1996: अनुशासनहीनता और खराब रवैये के चलते उन्हें भारत के खिलाफ सहारा कप के लिए पाक टीम से बाहर कर दिया गया।
1997: पाकिस्तान ए टीम के इंग्लैंड दौरे में टीम मैनेजर ने अपनी रिपोर्ट में उन्हें अनुशासनहीन बताया।
1999: पहली बार अंपायरों पीटर विली, डारेल हेयर ने उनके एक्शन पर अंगुली उठाई।
2000: गेंदबाजी एक्शन को सही करार दिया गया। मगर, चोट के चलते शुरुआती सत्र नहीं खेल सके। साइड स्ट्रेन और फिर कंधे में चोट के चलते शेष सत्र नहीं खेल सके।
2002: जनवरी में ढाका में मैच के दौरान दर्शकों ने उन पर पत्थर फेंका। इसके चलते वह चोटिल हुए और दौरे के आखिरी हिस्से में नहीं खेल सके। इसी साल जिम्बाब्वे में दर्शकों में बोतल फेंकने के चलते एक मैच के लिए प्रतिबंधित हुए। पहले टेस्ट में बाल टैंपरिंग का आरोप लगा, लेकिन बच गए।
2003: मई में त्रिकोणीय सीरीज में श्रीलंका के खिलाफ बाल टैंपरिंग के लिए प्रतिबंधित होने वाले सर्वकालिक दूसरे खिलाड़ी बने। इसी साल दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पहले टेस्ट में पाल एडम्स को अपशब्द कहने के लिए एक टेस्ट और दो वनडे का प्रतिबंध झेला।
2004: भारत के खिलाफ निराशाजनक सीरीज कमर दर्द के साथ समाप्त हुई। पूरे मैच में गेंदबाजी नहीं की, लेकिन बल्लेबाजी करने आए और 14 गेंद में 28 रन ठोंक दिए। इंजमाम ने सार्वजनिक रूप से चोट पर सवाल उठाए।
2006: भारतीय कोच ग्रेग चैपल ने एक्शन पर सवाल उठाए। चोट के चलते वनडे सीरीज से बाहर हो गए। लगातार संदेह बना रहा कि चोट के चलते बाहर हुए या एक्शन के।
2006: शक्तिवर्द्धक दवा के सेवन का दोषी पाए जाने के बाद दो साल के लिए प्रतिबंधित हो गए। भारत से वापस पाकिस्तान भेज दिया गया और चैंपियंस ट्राफी नहीं खेल सके। हालांकि, एक माह बाद प्रतिबंध हट गया।
2007: टीवी पर बाब कोच वूल्मर के साथ झड़प देखी गई और पीसीबी ने जुर्माना लगाया। अंतिम क्षणों में विश्व कप टीम में नहीं चुना गया। डर था कि वह वहां डोप टेस्ट में फंस सकते हैं।
2007: ट्वंटी 20 विश्व कप की तैयारी के दौरान बिना अनुमति के शिविर छोड़ कर चले गए। जुर्माना लगा। अपील के बाद दूसरी सुनवाई पर जुर्माना व आरोप हटा लिए गए। दक्षिण अफ्रीका में साथी मोहम्मद आसिफ पर ड्रेसिंग रूम में बल्ला चलाने पर उन्हें प्रतियोगिता से पूर्व स्वदेश वापसी का टिकट थमा दिया गया। बाद में 13 मैचों का प्रतिबंध लगा और लगभग 57,000 डालर का प्रतिबंध। तब से दो साल के ट्रायल पर थे। उनके व्यवहार पर निगाह रखी जा रही थी।
2008: पीसीबी ने नए केंद्रीय अनुबंध की शीर्ष कैटेगरी से उनका नाम हटा दिया। बोर्ड पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। पीसीबी ने पांच साल का प्रतिबंध लगाया।