बहादुरगढ [जासंकें]। स्थानीय बाला जी मंदिर में श्रद्धालुओं को प्रवचन सुनाते हुए महंत गोपालदास ने कहा कि भक्ति नम्रता, सच्चाई व दीनता से प्राप्त होती है। यह गुण संतों की संगति से मिलता है। संसार में दो प्रकार की विचारधाराओं
रसिकों के परम आराध्य श्रीबांकेबिहारी की महिमा का गुणगान किए बिना वृंदावन की चर्चा अधूरी है। उनके प्रकट होने की कथा अद्भुत है। माना जाता है कि आज से लगभग पांच शताब्दी पूर्व राधा रानी की सखी ललिता ने स्वामी हरिदास के रूप में अवतार लिया।
डासना स्थित प्राचीन देवी मंदिर में आज तक जो भी श्रद्धा के साथ माई के दरबार में गया वह खाली हाथ वापस नहीं आया। क्षेत्रीय लोगों व मंदिर के महंत का दावा है कि मंदिर के पास स्थित तालाब में नहाने से चर्मरोग दूर हो जाता है।
पूजा के अंत में हम सभी भगवान की आरती करते हैं। आरती के दौरान कई सामग्रियों का प्रयोग किया जाता है। इन सबका विशेष अर्थ होता है। ऐसी मान्यता है कि न केवल आरती करने, बल्कि इसमें शामिल होने पर भी बहुत पुण्य मिलता है। किसी भी देवता की आरती करते समय उन्हें 3 बार पुष्प अर्पित करें। इस दरम्यान ढोल, नगाड़े, घडि़याल आदि भी बजाना चाहिए।