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मनुष्य के मन में ही है सुख का सागर

मनुष्य के मन में ही है सुख का सागर

ई बस्ती स्थित बांके बिहारी मंदिर में श्रद्धालुओं को प्रवचन सुनाते हुए पण्डित गोविन्दराम ने कहा कि मानव सुख की तलाश में इधर-उधर भटक रहा है, लेकिन वह अपने मन में झांक कर नहीं देखता। जबकि मनुष्य के मन में ही सुख का सागर होता है।
चलते-फिरते लगाएं ध्यान

चलते-फिरते लगाएं ध्यान

लेखिका और एथलीट केरोलिन स्कॉट कोर्ज कहती हैं कि टहलना आपके ध्यान का माध्यम बन सकता है और अंतत: आप अध्यात्म से भी जुड़ सकते हैं। दरअसल, टहलते वक्त हम नितांत अकेले होते हैं, इसलिए मन में कई प्रकार के प्रश्न उठने लाजिमी है, जैसे-मैं कौन हूं? मेरी जिंदगी का उद्देश्य क्या है?
प्राचीन देवी मंदिर में पूरी होती है मनोकामना

प्राचीन देवी मंदिर में पूरी होती है मनोकामना

डासना स्थित प्राचीन देवी मंदिर में आज तक जो भी श्रद्धा के साथ माई के दरबार में गया वह खाली हाथ वापस नहीं आया। क्षेत्रीय लोगों व मंदिर के महंत का दावा है कि मंदिर के पास स्थित तालाब में नहाने से चर्मरोग दूर हो जाता है।
आरती क्यों और कैसे?

आरती क्यों और कैसे?

पूजा के अंत में हम सभी भगवान की आरती करते हैं। आरती के दौरान कई सामग्रियों का प्रयोग किया जाता है। इन सबका विशेष अर्थ होता है। ऐसी मान्यता है कि न केवल आरती करने, बल्कि इसमें शामिल होने पर भी बहुत पुण्य मिलता है। किसी भी देवता की आरती करते समय उन्हें 3 बार पुष्प अर्पित करें। इस दरम्यान ढोल, नगाड़े, घडि़याल आदि भी बजाना चाहिए।
 
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