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द का अर्थ है-जो स्थिर है और ग का अर्थ है- जिसमें गति है। उ का अर्थ है स्थिर और गतिमान के बीच का संतुलन और अ का अर्थ है अजन्मे ईश्वर की शक्ति। यानी दुर्गा का अर्थ हुआ, परमात्मा की वह शक्ति, जो स्थिर और गतिमान है, लेकिन संतुलित भी है।  
चैत्र-शुक्ल-प्रतिपदा को आदि तिथि भी कहा जाता है, क्योंकि इसी दिन ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना की थी। सनातन धर्म को मानने वाले लोग इस दिन को उत्सव की तरह मनाते हैं। खास बात यह है कि इस दिन ब्रह्मा की मूर्ति की न केवल तेल से मालिश की जाती है, बल्कि स्नान भी कराया जाता है। इसके बाद विधिपूर्वक उनकी पूजा की जाती है।  
भारतीय संस्कृति में पौष मास का अपना एक विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पौष मास में मांगलिक कार्य संपन्न नहीं किए जाते हैं। संभव है कि इस मान्यता के पीछे यही कारण हो कि इस मास में सांसारिक विषयों से ध्यान हटाकर आध्यात्मिक से रिश्ता जोड़ा जा सके।  
आदि शक्ति भगवती का नवम् रूप सिद्धिदात्रीहै, जिनकी चार भुजाएं हैं। उनका आसन कमल है। दाहिने और नीचे वाले हाथ में चक्र, ऊपर वाले हाथ में गदा, बाई ओर से नीचे वाले हाथ में शंख और ऊपर वाले हाथ में  
एकवेणीजपाकर्णपुरानाना खरास्थिता। लम्बोष्ठीकíणकाकर्णीतैलाभ्यशरीरिणी॥ वामपदोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा। वर्धनर्मूध्वजाकृष्णांकालरात्रिभर्यगरी॥ मां दुर्गा की सातवीं शक्ति कालरात्रि के नाम से जानी जाती हे। इनके शरीर का रंग घने अंधकार की तरह एकदम काला है, सिर के बाल बिखरे हुए हैं। गले में विद्युत की तरह चमकने  
 
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