21 फरवरी को केतु और चंद्र के बीच लुकाछिपी से लगने वाला चंद्रग्रहण भारत में केवल पश्चिमोत्तर क्षेत्र में चंद मिनटों के लिए दिखाई देगा। इससे वैश्विक परिदृश्य में श्वेत पदार्थ सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे। जिस समय यह खगोलीय घटनाक्रम होगा, भारत में सूर्योदय और चंद्रास्त की स्थिति होगी।
त्रिविधंश्राद्धमुच्यतेके अनुसार मत्स्य पुराण में तीन प्रकार के श्राद्ध बतलाए गए है, जिन्हें नित्य, नैमित्तिक एवं काम्य के नाम से जाना जाता है। यमस्मृतिमें पांच प्रकार के श्राद्धों का वर्णन मिलता है। जिन्हें नित्य, नैमित्तिक काम्य, वृद्धि और पार्वण के
श्राद्ध-कर्म का प्रारंभ भाद्रपद मास की पूर्णिमा से हो जाता है। यद्यपि तर्पण और श्राद्ध मुख्यतया पितृपक्ष में ही होते हैं, किन्तु इसके अश्विन मास के कृष्णपक्ष में होने से इस काल-खण्ड में पूर्णिमा उपलब्ध नहीं होती है। धर्मग्रन्थों का
अश्विन कृष्णपक्ष को अपर पक्ष व पितृपक्ष माना जाता है। धर्मशास्त्र के अनुसार जब कन्या राशि पर सूर्य पहुंचते हैं, वहां से 16दिन पितरोंकी तृप्ति के लिए तर्पण पिण्डदानादिकरना पितरोंके लिए तृप्तिकारकमाना गया है। पितरोंकी तृप्ति से घर में पुत्र
सनातन अथवा हिन्दू धर्म की संस्कृति संस्कारों पर ही आधारित है। हमारे ऋषि-मुनियों ने मानव जीवन को पवित्र एवं मर्यादित बनाने के लिये संस्कारों का अविष्कार किया। धार्मिक ही नहीं वैज्ञानिक दृष्टि से भी इन संस्कारों का हमारे जीवन में