मुख्य पृष्ठ धार्मिक समाचार पूजा पाठ धार्मिक स्थान
राजर्षि जनक के राज्य में दुर्भिक्ष का तांडव जारी था। अनावृष्टि से सर्वत्र त्राहि-त्राहि मची थी। सभी प्राणी क्षुधा-पिपासा से व्यग्र हो रहे थे। कितने काल-कवलित हो चुके थे। राजा जनक ने अपने गुरु से परामर्श किया तो उन्होंने इंगित  
सन्ध्या ब्रह्मा की मानस पुत्री थी जो तपस्या के बल पर अगले जन्म में अरुन्धती के रूप में महर्षि वसिष्ठ की पत्‍‌नी बनी। वह तपस्या करने के लिये चन्द्रभाग पर्वत के बृहल्लोहित नामक सरोवर के पास सद्गुरु की खोज में  
विदर्भ नरेश भीम की पुत्री दमयन्ती का विवाह राजा नल के साथ हुआ था। नल ने धर्मानुसार प्रजा का रञ्जन करके राजा नाम को सार्थक किया था। उसके रूप गुण सम्पन्न एक पुत्र और एक सुन्दरी पुत्री हुई जिनका नाम  
प्राचीन काल में काशी के एक राजा महापराक्रमी शत्रुजित् नाम के थे। उनके पुत्र का नाम ऋतुध्वज था। ब्रह्मवादिनी मदालसा इन्हीं ऋतुध्वज की पटरानी थी और विश्वावसु गन्धर्वराज की पुत्री थीं। इनका ब्रह्मज्ञान जगद्विख्यात है। पुत्रों को पालने में झुलाते-झुलाते  
सावित्री प्रसिद्ध तत्त्‍‌वज्ञानी राजर्षि अश्वपति की एकमात्र कन्या थी। अपने वर की खोज में जाते समय उसने निर्वासित और वनवासी राजा द्युमत्सेन के पुत्र सत्यवान् को पतिरूप में स्वीकार कर लिया। जब देवर्षि नारद ने उनसे कहा कि सत्यवान् की  
 
जागरण में अन्यत्र
समाचार
मां प्रेम ऋतंभरा
पंचांग
 
ELSEWHERE ON YAHOO!
News
Astrology
Answers