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बहादुरगढ [जासंकें]। लाइन पर शिव मंदिर में प्रवचन सुनाते हुए पंडित जय भगवान कसारियाने कहा कि लोगों ने ईश्वर-उपासना, पूजा-पाठ, जप-तप को भी सांसारिक प्रलोभनों का ही साधना बना लिया है। उनका उद्देश्य किसी प्रकार धन प्राप्त करना होता है।  
उपमंडल के गांव सौलधा के सत्संग भवन में श्रद्धालुओं को प्रवचन सुनाते हुए पंडित कर्ण सिंह ने कहा कि संतों के सत्संग से जीव को संसार और शरीर को असलियत का पता चलता है। आत्मा और परमात्मा के आपसी रिश्ते का ज्ञान होता है और आत्मा का परमात्मा में अभेद करने की युक्ति का पता चलता है। जब जीव सतगुरु द्वारा बताई हुई युक्ति के मुताबिक अभ्यास करता है तो उसकी अवस्था बदलती है और उसका रूहानी सफर तय होता है।  
स्थानीय वेदान्त आश्रम में श्रद्धालुओं को प्रवचन सुनाते हुए स्वामी देवेंद्रानन्द गिरी ने कहा कि राम नाम ही चंद्रमा है, राम नाम ही सूर्य है, राम नाम ही अग्नि है और राम नाम ही मनुष्य को इस जीवन रूपी भव सागर से पार उतार सकता है।  
सौलधा में प्रवचनों के दौरान पंडित कर्ण सिंह ने कहा कि शिव साक्षात विश्वास का स्वरूप है और पार्वती श्रद्धा है। भक्त की नजर में दोनों शब्द समान है परन्तु संतों की नजर में दोनों में अंतर है। विश्वास आत्मा का धर्म है और स्थिर रहता है। जबकि किसी मानव के कमरें को देखकर उसके प्रति श्रद्धा उत्पन्न होती है जो की समय के साथ घटती-बढ़ती रहती है।  
बहादुरगढ [जासंकें]। स्थानीय बाला जी मंदिर में श्रद्धालुओं को प्रवचन सुनाते हुए महंत गोपालदास ने कहा कि भक्ति नम्रता, सच्चाई व दीनता से प्राप्त होती है। यह गुण संतों की संगति से मिलता है। संसार में दो प्रकार की विचारधाराओं  
 
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