| पार्टियां | | चुनाव लड़े | | जीते | | वोट प्रतिशत | |
| कांग्रेस | | 229 | | 38 | | 31.61 | |
| भाजपा | | 230 | | 173 | | 42.5 | |
| बीएसपी | | 157 | | 02 | | 7.26 | |
| सीपीएम | | 09 | | 01 | | 0.24 | |
| एनसीपी | | 105 | | 01 | | 1.27 | |
| जद [यू] | | 36 | | 01 | | 0.55 | |
| सपा | | 161 | | 07 | | 4.73 | |
| जीजीपी | | 61 | | 03 | | 2.03 | |
| आरएसएमडी | | 55 | | 02 | | 5.52 | |
| निर्दलीय | | - | | 02 | | - | |
-मध्य प्रदेश में लगातार दस वर्षो से शासन कर रही कांग्रेस तीसरी बार सत्ता पाने का सपना देख रही थी। लेकिन बिजली, सड़क व पानी के मुद्दे पर लड़े गए इस चुनाव में मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह गच्चा खा गए। भाजपा ने पार्टी की तेजतर्रार नेता उमा भारती को मुख्यमंत्री के रूप में प्रोजेक्ट किया था। उमा ने जबरदस्त घेराबंदी करते हुए कांग्रेस को तगड़ा झटका दिया और वह मुख्यमंत्री की कुर्सी पर विराजमान हुई।
| पार्टियां | | चुनाव लड़े | | जीते | | वोट प्रतिशत | |
| कांग्रेस | | 316 | | 172 | | 40.59 | |
| भाजपा | | 320 | | 119 | | 39.28 | |
| बीएसपी | | 170 | | 11 | | 6.15 | |
| जनता दल | | 144 | | 01 | | 1.87 | |
| जनता पार्टी | | 14 | | 01 | | 0.20 | |
| आरपीआई | | 20 | | 01 | | 0.13 | |
| एसपी | | 94 | | 04 | | 1.58 | |
| एजेबीपी | | 78 | | 01 | | 0.55 | |
| निर्दलीय | | - | | 10 | | - | |
-1998 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 320 सीटों में 316 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े किए। कांग्रेस ने 172 सीटों पर कब्जा कर लगातार दूसरी बार दिग्विजय सिंह के नेतृत्व में सरकार बनाई। विपक्षी पार्टी भाजपा को 119 सीट से ही संतोष करना पड़ा और कांग्रेस से सत्ता छीनने का उसका सपना अधूरा रह गया। बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी अपनी उपस्थिति का ही एहसास करा सकी।
| पार्टियां | | चुनाव लड़े | | जीते | | वोट प्रतिशत | |
| कांग्रेस | | 318 | | 174 | | 40.67 | |
| भाजपा | | 320 | | 117 | | 38.82 | |
| सीपीआई | | 63 | | 02 | | 0.98 | |
| सीपीएम | | 16 | | 01 | | 0.32 | |
| जनता दल | | 257 | | 04 | | 3.90 | |
| बसपा | | 286 | | 11 | | 7.05 | |
| सीएमएम | | 23 | | 01 | | 0.40 | |
| केएसएम | | 04 | | 01 | | 0.21 | |
| आरपीआई [के] | | 10 | | 01 | | 0.10 | |
| निर्दलीय | | - | | 08 | | - | |
-मध्यप्रदेश के 1993 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 320 में 174 सीट जीतकर पूर्ण बहुमत हासिल कर ली। जबकि भाजपा को 117 सीटों से ही संतोष करना पड़ा। बसपा और जनता दल को क्रमश: 11 और 4 सीटें प्राप्त हुई।
| पार्टियां | | चुनाव लड़े | | जीते | | वोट प्रतिशत | |
| कांग्रेस | | 318 | | 56 | | 33.38 | |
| भाजपा | | 269 | | 220 | | 39.14 | |
| सीपीआई | | 61 | | 03 | | 1.25 | |
| जनता दल | | 115 | | 28 | | 7.71 | |
| बसपा | | 183 | | 02 | | 3.54 | |
| केएसएम | | 20 | | 01 | | 0.40 | |
| निर्दलीय | | - | | 10 | | - | |
-मध्यप्रदेश के 1990 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 320 में 220 सीटें जीतकर शानदार सफलता हासिल की। कांग्रेस को मध्यप्रदेश के इतिहास की सबसे बुरी पराजय झेलनी पड़ी। पार्टी को मात्र 56 सीटों पर ही सफलता मिल सकी। भाजपा ने अपने वरिष्ठ नेता सुंदर लाल पटवा को मुख्यमंत्री की कुर्सी सौंपी।
| पार्टियां | | चुनाव लड़े | | जीते | | वोट प्रतिशत | |
| कांग्रेस | | 320 | | 250 | | 48.87 | |
| भाजपा | | 312 | | 58 | | 32.45 | |
| आईसीएस | | 30 | | 01 | | 0.23 | |
| जेएनपी | | 171 | | 05 | | 3.99 | |
| निर्दलीय | | - | | 06 | | - | |
-मध्यप्रदेश के 1985 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने जबरदस्त सफलता प्राप्त की। इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए इस चुनाव में कांग्रेस को 320 में से 250 सीटों में विजयी मिली। भाजपा 58 सीटें प्राप्त कर दूसरे नंबर पर रही। अन्य दल केवल अपनी उपस्थिति ही दर्ज करा सके।
| पार्टियां | | चुनाव लड़े | | जीते | | वोट प्रतिशत | |
| कांग्रेस[आई] | | 320 | | 246 | | 47.52 | |
| भाजपा | | 310 | | 60 | | 30.34 | |
| सीपीआई | | 46 | | 02 | | 1.50 | |
| जेएनपी[जेपी] | | 124 | | 02 | | 2.88 | |
| जेएनपी[एससी] | | 204 | | 01 | | 4.82 | |
| आरपीके | | 13 | | 01 | | 0.33 | |
| निर्दलीय | | - | | 08 | | - | |
-मध्यप्रदेश के 1980 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने एक बार फिर 246 सीटें जीतकर अपनी बादशाहत कायम रखी। विपक्षी पार्टी भाजपा को 60 सीटों से ही संतोष करना पड़ा।
| पार्टियां | | चुनाव लड़े | | जीते | | वोट प्रतिशत | |
| कांग्रेस | | 320 | | 84 | | 35.88 | |
| जेएनपी | | 319 | | 230 | | 47.28 | |
| आरआरपी | | 04 | | 01 | | 0.35 | |
| निर्दलीय | | - | | 05 | | - | |
-मध्यप्रदेश के 1977 के विधानसभा चुनाव में भी भारतीय जनसंघ ने शानदार सफलता हासिल की। जनसंघ ने 320 सीटों में 230 सीटों पर कब्जा जमाकर ऐतिहासिक सफलता प्राप्त की। कांग्रेस को 84 सीटों पर विजयी मिली।
| पार्टियां | | चुनाव लड़े | | जीते | | वोट प्रतिशत | |
| कांग्रेस | | 289 | | 220 | | 47.93 | |
| बीजेएस | | 260 | | 48 | | 28.64 | |
| सीपीआई | | 05 | | 03 | | 1.02 | |
| एसओपी | | 149 | | 07 | | 6.24 | |
| निर्दलीय | | - | | 18 | | - | |
-मध्यप्रदेश के 1972 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की। कांग्रेस को 296 में 220 सीटों पर सफलता प्राप्त की। विपक्षी पार्टी भारतीय जनसंघ को 48 सीटों से ही संतोष करना पड़ा।
| पार्टियां | | चुनाव लड़े | | जीते | | वोट प्रतिशत | |
| कांग्रेस | | 296 | | 167 | | 40.60 | |
| बीजेएस | | 265 | | 78 | | 28.28 | |
| सीपीआई | | 33 | | 01 | | 1.11 | |
| पीएसपी | | 110 | | 09 | | 4.68 | |
| एसएसपी | | 114 | | 10 | | 5.28 | |
| एसडब्ल्यूए | | 21 | | 07 | | 2.55 | |
| जेएसी | | 33 | | 02 | | 1.52 | |
| निर्दलीय | | - | | 22 | | - | |
-मध्यप्रदेश के 1967 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 296 में से 167 सीटों पर जीत हासिल की। वहीं भारतीय जनसंघ को 78 सीटें ही प्राप्त हो सकी। प्रजा सोशलिस्ट पार्टी और संघट सोशलिस्ट पार्टी को क्रमश: 9 और 11 सीटों पर जीत मिली।
| पार्टियां | | चुनाव लड़े | | जीते | | वोट प्रतिशत | |
| कांग्रेस | | 288 | | 142 | | 38.54 | |
| सीपीआई | | 42 | | 01 | | 2.02 | |
| जेएस | | 195 | | 41 | | 16.66 | |
| पीएसपी | | 140 | | 33 | | 10.72 | |
| एसओसी | | 86 | | 14 | | 4.73 | |
| एसडब्ल्यूए | | 43 | | 02 | | 1.23 | |
| एचएमएस | | 50 | | 06 | | 3.23 | |
| आरआरपी | | 76 | | 10 | | 3.79 | |
| निर्दलीय | | - | | 39 | | - | |
-मध्यप्रदेश के 1962 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पूर्ण बहुमत से तीन सीटें दूर रही। उसे 288 में 142 सीटें ही प्राप्त हुई। जनसंघ को महज 41 सीटें ही मिली। प्रजा सोशलिस्ट पार्टी, सोशलिस्ट और राम राज्य परिषद को क्रमश: 30, 14 व 10 सीटों से ही संतोष करना पड़ा। कांग्रेस ने निर्दलीय को साथ में लेकर सरकार का गठन किया।
| पार्टियां | | चुनाव लड़े | | जीते | | वोट प्रतिशत | |
| कांग्रेस | | 288 | | 232 | | 49.83 | |
| सीपीआई | | 25 | | 02 | | 1.63 | |
| बीजेएस | | 127 | | 10 | | 9.90 | |
| पीएसपी | | 154 | | 12 | | 13.17 | |
| एचएमएस | | 43 | | 07 | | 4.66 | |
| आरआरपी | | 51 | | 05 | | 3.09 | |
| निर्दलीय | | - | | 20 | | - | |
-मध्यप्रदेश के 1957 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने शानदार सफलता हासिल की। कांग्रेस को 288 में से 232 सीटें प्राप्त हुई। वहीं भारतीय जनसंघ को मात्र 10 सीटों पर ही जीत मिल सकी।
| पार्टियां | | चुनाव लड़े | | जीते | | वोट प्रतिशत | |
| कांग्रेस | | 225 | | 194 | | 49.07 | |
| केएमपीपी | | 71 | | 08 | | 5.22 | |
| आरआरपी | | 35 | | 03 | | 2.51 | |
| एसपी | | 143 | | 02 | | 9.46 | |
| एसकेपी | | 19 | | 02 | | 1.45 | |
| निर्दलीय | | - | | 23 | | - | |
-आजादी के बाद मध्यप्रदेश में 1951 में हुए पहले विधानसभा चुनाव में कुल 232 में से कांग्रेस को 194 सीटें प्राप्त हुई। किसान मजदूर प्रजा पार्टी को आठ सीटें जबकि अखिल भारतीय राम राज्य परिषद को तीन सीटों से संतोष करना पड़ा।