| पार्टियां | | चुनाव लड़े | | जीते | | वोट प्रतिशत | |
| कांग्रेस | | 78 | | 20 | | 24.24 | |
| नेकां | | 85 | | 28 | | 28.24 | |
| पीडीपी | | 59 | | 16 | | 9.82 | |
| सीपीएम | | 07 | | 02 | | 0.88 | |
| भाजपा | | 58 | | 01 | | 8.57 | |
| बीएसपी | | 33 | | 01 | | 4.5 | |
| डीएम | | 01 | | 01 | | 0.62 | |
| जेकेएएल | | 09 | | 01 | | 0.91 | |
| जेकेएनपीपी | | 36 | | 04 | | 3.83 | |
| निर्दलीय | | - | | 13 | | - | |
-जम्मू-कश्मीर के 2002 के विधानसभा चुनाव में नेशनल कांफ्रेंस के नेता फारुख अब्दुल्ला लगातार तीसरी बार मुख्यमंत्री बनने का सपना देख रहे थे। लेकिन राज्य की जनता ने किसी भी पार्टी पर विश्वास नहीं जताते हुए त्रिशंकु विधानसभा का गठन करने को मजबूर किया। तीनों प्रमुख दलों नेशनल कांफ्रेंस, पीडीपी और कांग्रेस में किसी भी पार्टी को पूर्ण बहुमत हासिल नहीं हुआ। इस कड़ी में मुफ्ती मुहम्मद सईद के नेतृत्व वाली पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी [पीडीपी] ने कांग्रेस के हाथ को थमाते हुए सरकार की नींव रखी। दोनों पार्टियों ने आपसी सहमति के बाद सरकार बनाने का फार्मूला तैयार किया। इस आधार पर दोनों पार्टियों को तीन-तीन साल तक राज्य की कमान संभालनी थी। पीडीपी ने तो तीन साल तक सत्ता का सुख भोगा लेकिन उसके बाद कांग्रेस की ओर से गुलाम नवी आजाद के नेतृत्व में चल रही कांग्रेस की सरकार को गिरा कर राज्य को मध्यावधि चुनाव की आग में झोंक दिया।
| पार्टियां | | चुनाव लड़े | | जीते | | वोट प्रतिशत | |
| कांग्रेस | | 84 | | 07 | | 20.00 | |
| एएचसी [टी] | | 09 | | 01 | | 0.70 | |
| भाजपा | | 53 | | 08 | | 12.13 | |
| सीपीएम | | 04 | | 01 | | 0.96 | |
| बीएसपी | | 29 | | 04 | | 6.43 | |
| जेकेएन | | 81 | | 57 | | 34.78 | |
| जेपीपी | | 45 | | 01 | | 2.25 | |
| जेकेएएल | | 27 | | 01 | | 2.43 | |
| निर्दलीय | | - | | 01 | | - | |
-1996 के विधानसभा चुनाव में फारुख अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली जम्मू-कश्मीर नेशनल कांफ्रेंस ने 87 में से 57 सीटों पर कब्जा जमा लिया। अब्दुल्ला प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस को बड़ी हार का सामना करना पड़ा। उसे मात्र सात सीटें ही मिली।
| पार्टियां | | चुनाव लड़े | | जीते | | वोट प्रतिशत | |
| कांग्रेस | | 31 | | 26 | | 20.20 | |
| भाजपा | | 29 | | 02 | | 5.10 | |
| जेकेएन | | 45 | | 40 | | 32.98 | |
| निर्दलीय | | - | | 08 | | - | |
-जम्मू-कश्मीर के 1987 के विधानसभा चुनाव में नेशनल कांफ्रेंस ने 76 में से 40 सीटें जीत ली। कांग्रेस ने 31 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे लेकिन उसे 26 सीटों पर ही जीत मिल सकी। भाजपा दो सीटें जीतकर कुछ खास प्रभाव नहीं छोड़ पाई। जम्मू में कांग्रेस ने भाजपा की एक नहीं चलने दी।
| पार्टियां | | चुनाव लड़े | | जीते | | वोट प्रतिशत | |
| कांग्रेस | | 71 | | 26 | | 30.32 | |
| जेकेएन | | 75 | | 46 | | 47.29 | |
| जेकेपी | | 38 | | 01 | | 4.58 | |
| निर्दलीय | | - | | 02 | | - | |
-जम्मू-कश्मीर के 1983 के विधानसभा चुनाव में नेशनल कांफ्रेंस ने 76 सीटों में 46 सीटें जीती। कांग्रेस को 26 सीटों से ही संतोष करना पड़ा।
| पार्टियां | | चुनाव लड़े | | जीते | | वोट प्रतिशत | |
| कांग्रेस | | 63 | | 11 | | 16.89 | |
| जेएनपी | | 72 | | 13 | | 23.72 | |
| जेकेएन | | 75 | | 47 | | 46.22 | |
| जेएमआई | | 19 | | 01 | | 3.59 | |
| निर्दलीय | | - | | 04 | | - | |
-जम्मू-कश्मीर के 1977 के विधानसभा चुनाव में नेशनल कांफ्रेंस ने 76 में 47 सीटों पर सफलता प्राप्त की। जनता पार्टी ने दूसरी नंबर पर रहते हुए 13 सीटें जीती जबकि कांग्रेस 11 सीटों पर ही जीत हासिल कर सकी।
| पार्टियां | | चुनाव लड़े | | जीते | | वोट प्रतिशत | |
| कांग्रेस | | 74 | | 58 | | 55.44 | |
| बीजेएस | | 32 | | 03 | | 9.85 | |
| जेएमआई | | 22 | | 05 | | 7.18 | |
| निर्दलीय | | - | | 09 | | - | |
-जम्मू-कश्मीर के 1972 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 75 में 58 सीटों पर जीत हासिल कर अपना दबदबा बनाया। जमात-ए-इस्लाम को मात्र 05 सीटों पर ही सफलता मिल सकी। जबकि भारतीय जनसंघ को तीन सीटें की प्राप्त हो सकी।
| पार्टियां | | चुनाव लड़े | | जीते | | वोट प्रतिशत | |
| कांग्रेस | | 75 | | 61 | | 53.02 | |
| बीजेएस | | 29 | | 03 | | 16.45 | |
| जेकेएन | | 38 | | 08 | | 17.16 | |
| निर्दलीय | | - | | 03 | | - | |
-जम्मू-कश्मीर के 1967 के विधानसभा चुनाव में 75 में से 61 सीटों पर कांग्रेस ने जीत हासिल की। नेशनल कांफ्रेंस को आठ सीटों पर जीत से संतोष करना पड़ा। भारतीय जनसंघ को तीन सीटें मिली।
| पार्टियां | | चुनाव लड़े | | जीते | | वोट प्रतिशत | |
| एनसी | | 75 | | 70 | | 66.96 | |
| पीपी | | 25 | | 03 | | 17.47 | |
| निर्दलीय | | 38 | | 02 | | 7.42 | |
-जम्मू-कश्मीर में 1962 में पहली बार भारतीय संविधान के अंतर्गत कराए गए विधानसभा चुनाव में नेशनल कांफ्रेंस ने 75 विधानसभा सीटों में 70 सीटें जीतकर प्रदेश में नई राजनीति का आगाज किया।