आयुष ने इसी साल काफी अच्छे अंकों से ग्रेजुएशन कम्प्लीट किया है। ग्रेजुएशन करने के दौरान ही उसने यह तय कर लिया था कि इसके बाद वह कैट क्लियर कर आईआईएम से एमबीए करेगा, लेकिन ग्रेजुएशन की परीक्षा देने के दौरान ही उसे पता चला कि इस बार यानी वर्ष 2009 से कैट को ऑनलाइन कर दिया गया है।
अर्थात अब कंप्यूटर के माध्यम से पेपरलेस परीक्षा देनी होगी। यह जानकर आयुष चिंतित हो गया था कि क्या उसकी तैयारी निरर्थक हो जाएगी, क्योंकि वह तो पिछले एक साल से पुराने पैटर्न से ही कैट की तैयारी कर रहा है? क्या अब उसे नए सिरे से तैयारी करनी होगी? लेकिन जब उसने इस बारे में विषेषज्ञों से पता करने के साथ-साथ कैट की वेबसाइट को भी खंगाला, तो उसकी चिंता दूर हो गई। वह इस बात के लिए आश्वस्त हो गया कि कैट का परीक्षा पैटर्न पहले जैसा ही है, बस टेस्ट अब पेपर पर देने की बजाय कंप्यूटर पर देना होगा।
दरअसल, कैट में सम्मिलित हो रहे या भविष्य में इसमें अपीयर होने की योजना बना रहे अधिकांश अभ्यर्थियों में इस तरह का भ्रम है। उन्हें यह लगता है कि कहीं ऑनलाइन होने के कारण कैट कुछ और मुश्किल तो नहीं हो गया है?
दूर भगाएं डर
ऑनलाइन एग्जाम को लेकर डरने की जरूरत इसलिए नहीं है, क्योंकि परीक्षा के स्वरूप में कोई परिवर्तन नहीं किया है। इसका अभिप्राय यह है कि परीक्षा पेपर की बजाय कंप्यूटर पर देनी होगी। पहले परीक्षार्थी आंसरशीट पर उत्तर के रूप में गोले को काला करते थे, लेकिन अब उन्हें कंप्यूटर पर एग्जाम देते समय चार उत्तरों में से किसी एक पर क्लिक करना होगा, जो आपके अनुसार सही उत्तर है।
कंप्यूटर पर करें प्रैक्टिस
जो कैंडीडेट कंप्यूटर से उतने फेमिलियर नहीं हैं, उन्हें चाहिए कि 28 नवंबर, 2009 से आरंभ होने वाली ऑनलाइन परीक्षा से पहले कंप्यूटर पर प्रश्न हल करने का अभ्यास करें। हालांकि यह जरूरी नहीं कि सभी अभ्यर्थियों के पास कंप्यूटर हो ही, लेकिन इस बारे में चिंता की बात इसलिए नहीं है, क्योंकि प्रतिदिन निकटवर्ती साइबर कैफे में जाकर एक से दो घंटे की रेगुलर प्रैक्टिस की जा सकती है। इससे न केवल आप कंप्यूटर एप्लिेकेशन से परिचित होंगे, बल्कि ज्यादा अभ्यास करने से आपका कॉन्फिडेंस लेवल भी बढेगा।
वर्बल एबिलिटी पर अपनी पकड बनाने के लिए रीडिंग कॉम्प्रिहेंशन पर अधिक से अधिक ध्यान देना चाहिए। इसके लिए रोज पैसेज पढने और उस पर आधारित प्रश्नों के जवाब देने का अभ्यास करें। ध्यान रखें, पैसेज समसामयिक विषयों या विज्ञान से जुडे भी हो सकते हैं। इससे संबंधित प्रश्नों का सही जवाब देने के लिए पैसेज को अच्छी तरह से समझना आवश्यक है।
क्या न करें
चूंकि परीक्षा में अब बीस दिन से भी कम का समय रह गया है, इसलिए कुछ नया पढने की बजाय आपने जो पहले से पढा है, उसे ही और स्ट्रॉन्ग करने का प्रयास करें। इस समय यह बिल्कुल न सोचें कि जो पार्ट छूट गया है, उसे भी पढ लें। ऐसा करने पर हो सकता है कि किसी हिस्से पर आपकी मजबूत पकड न पाए और आपकी दुविधा भी बढे।
इसके अलावा, ऑनलाइन एग्जाम आरंभ होते ही प्रश्नों को हल करना आरंभ न कर दें, बल्कि उत्तर देना आरंभ करने से पहले इस बात पर विचार कर लें कि परीक्षा के तीनों खंडों- वर्बल एबिलिटी, डाटा एंटरप्रेटेशन और क्वांटिटेटिव एप्टीट्यूड में से कौन सा पार्ट आपको अधिक आसान लगता है? उसी पार्ट से संबंधित प्रश्नों को आप सबसे पहले हल करने का प्रयास करें। इसके बाद दूसरे पार्ट के प्रश्नों पर ध्यान दें। चूंकि परीक्षा के लिए समय सीमित होगा, इसलिए कठिन लगने वाले प्रश्नों पर समय नष्ट न करें और उसे छोडकर आगे के प्रश्नों को हल करें। बाद में समय बचने पर इन छूटे प्रश्नों को हल करने का प्रयास करें।
टोटल पर दें ध्यान
हो सकता है कि तीनों खंडों में से किसी एक या दो पर आपकी पकड बहुत मजबूत हो और उनसे संबंधित सभी प्रश्नों के उत्तर देना पसंद करें, लेकिन ऐसा करते समय टाइम मैनेजमेंट का जरूर ध्यान रखें। ऐसा न हो कि आप एक या दो खंडों के तो सभी या अधिकांश प्रश्नों को हल कर दें, लेकिन तीसरे खंड के कुछ ही प्रश्नों को हल कर पाएं।
ऐसे में आपकी सारी मेहनत पर पानी फिर सकता है। ऐसी स्थिति से बचने के लिए बेहतर यही होगा कि आप सभी खंडों पर एक समान ध्यान दें और सभी के प्रश्न हल करें। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट और इसके समकक्ष संस्थान इंडिविजुअल स्कोर के साथ-साथ टोटल स्कोर पर भी ध्यान देते हैं।
ध्यान रखने वाली बातें
बचे हुए समय में कुछ नया पढने की बजाय पहले से पढे हुए को और स्ट्रांग करें, ताकि इनसे संबंधित किसी भी प्रश्न को हल करने में आपको कठिनाई न हो।
कंप्यूटर पर मॉडल प्रश्नपत्रों को हल करने का अधिक से अधिक अभ्यास करें।
प्रश्नों का रिव्यू करने के बाद ही उत्तर देना आरंभ करें।
सभी खंडों के प्रश्नों पर बराबर का ध्यान दें।
इसके लिए पहले से ही योजना बनाकर चलें।
कठिन लगने वाले प्रश्नों पर वक्त जाया करने की बजाय आगे के प्रश्नों को हल करें।
कुछ समय रिवीजन के लिए भी अवश्य रखें।
प्रस्तुति: अरुण श्रीवास्तव
arunsrivastav@nda.jagran.com
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