कठिन नहीं मुख्य परीक्षा का चक्रव्यूह तोड़ना

कठिन नहीं मुख्य परीक्षा का चक्रव्यूह तोड़ना

सपने हकीकत में तभी बदलते हैं, जब कडी मेहनत को सही रणनीति के साथ सही दिशा दी जाए। 23 अक्टूबर से शुरू होनेवाली सिविल सर्विसेज मुख्य परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों के लिए अब सही रणनीति के साथ अंतिम तौर पर कठिन मेहनत का समय आ गया है।

ॐ आईएएस एकेडमी के डायरेक्टर ओम प्रताप सुधांशु का मानना है कि अब परीक्षा के लिए कम दिन बचे हैं और शेष समय का सदुपयोग अभ्यर्थियों को सफलता के काफी करीब पहुंचा सकता है। वे कहते हैं कि किसी भी परीक्षा की तैयारी पिरामिड संरचना पर आधारित होती है।

इसमें शुरुआती दौर की तैयारी तो संपूर्ण सिलेबस कवरेज से होता है, किंतु परीक्षा का समय जैसे-जैसे नजदीक आ रहा होता है, वैसे-वैसे पिरामिड के शीर्ष की भांति तैयारी भी सिलेबस के कोर एरिया के महत्वपूर्ण सेक्शन तक केन्द्रित होनी चाहिए। और चयनित सेक्शन का बार-बार अध्ययन किया जाना चाहिए।

कितने होते हैं पेपर

सिविल सर्विसेज मुख्य परीक्षा में सभी अभ्यर्थियों को दो वैकल्पिक विषय, सामान्य अध्ययन, निबंध, सामान्य हिंदी तथा सामान्य अंग्रेजी की परीक्षा से गुजरना होता है। इसमें दोनों वैकल्पिक विषय, सामान्य अध्ययन और निबंध के प्राप्तांक मेरिट लिस्ट निर्धारित करते हैं, वहीं सामान्य हिंदी तथा सामान्य अंग्रेजी के प्रश्न-पत्र क्वालीफाइंग प्रकृति के होते हैं।

बनाएं बेहतर रणनीति

ऐसा देखा जाता है कि तैयारी के दौरान टाइम की तकरीबन पूरी शिफ्टिंग मेरिट सूची निर्धारित करने वाले विषयों की ओर हो जाती है और सामान्यत: क्वालीफाइंग विषयों की तैयारी उपेक्षित हो जाती है।

इसका परिणाम होता है कि कई हिंदी माध्यम के अभ्यर्थी सामान्य अंग्रेजी में क्वालीफाई नहीं हो पाते हैं, तो कई अंग्रेजी बैक ग्राउंड के प्रतियोगी सामान्य हिंदी में क्वालीफाई नहीं कर पाते हैं। इससे पूरी तैयारी के बावजूद भी संतुलित तैयारी की कमी के कारण प्रतियोगिता से बाहर हो जाते हैं, क्योंकि इन विषयों में बिना क्वालीफाई के उनके अन्य विषयों की कॉपी नहीं जांची जाती है।

सार्थक आईएएस के डायरेक्टर कुमार सर्वेश का कहना है कि यद्यपि तैयारी के दौरान इन मैरिट सूची निर्धारित करने वाले विषयों पर ज्यादा समय दिया जाना चाहिए, किंतु क्वालीफाइंग विषयों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। कुमार सर्वेश कहते हैं कि क्वालीफाइंग विषयों का कोई निर्धारित सिलेबस नहीं है। अत: इन विषयों की तैयारी विगत 10 वर्षो में पूछे गए प्रश्नों की प्रकृति को जांच-समझकर की जा सकती है।

अभ्यास जरूरी

सिविल सर्विसेज मुख्य परीक्षा में निबंध (200 अंक) एक महत्वपूर्ण सेक्शन होता है। इसके अंक मैरिट सूची को निर्धारित करते हैं। अंतिम 25-30 दिनों में निबंध की तैयारी की रणनीति क्या होनी चाहिए?

इस सवाल के जवाब में दीपक कुमार सिंह (व्याख्याता, ध्येय आईएएस) का कहना है कि अभ्यर्थियों को पूर्व में अपनी रुचि तथा पकड के हिसाब से चयनित टॉपिक पर एकत्रित किए गए पाठ्य सामग्री/मैटेरियल्स के मुख्य बिंदुओं का बार-बार रिविजन करना चाहिए।

अभ्यर्थियों को शेष बचे समय में सप्ताहांत में तीन-चार निबंध लिखकर अपने सीनियर्स या विशेषज्ञ इस संबंध में सलाह ले सकते हैं। इससे यदि निबंध में क्रमबद्धता, मौलिकता एवं कंटेंट संबंधी समस्या है, तो उसे समय रहते दूर किया जा सके।

सामान्य अध्ययन

सामान्य अध्ययन के प्रथम पत्र का सिलेबस पूरी तरह ट्रेडिशनल है। अत: शेष बचे समय में पूर्व में बनाए गए नोट्स का रिवीजन तथा उनके हरेक पहलुओं के तार्किक विवेचन के द्वारा इसे अंकदायी बनाया जा सकता है।

ओम प्रताप सुंधांशु का कहना है कि अब कुछ नई चीज पढने की जरूरत नहीं है, बल्कि पहले से पढी गई चीजों का ही रिवीजन तथा तार्किक विश्लेषण जरूरी है।

द्वितीय प्रश्न पत्र समसामयिक मुद्दों तथा विज्ञान प्रौद्योगिकी आदि टॉपिक के कारण ज्यादा डाइनेमिक हो जाता है। सम-सामयिक प्रश्नों की तैयारी के लिए अभ्यर्थी नए व स्तरीय मैटेरियल्स का अब भी अध्ययन कर सकते हैं। शेष बचे समय में निर्धारित समय के अंदर उत्तर लेखन उपयोगी हो सकता है।

वैकल्पिक विषय

सिविल सेवा मुख्य परीक्षा के दोनों वैकल्पिक विषयों की तैयारी की भी शेष बचे समय में विशेष रणनीति होनी चाहिए। इस संदर्भ में निर्वाण आईएएस एकेडमी के डायरेक्टर कमलदेव का कहना है कि अब दोनों वैकल्पिक विषयों के सिर्फ कोर एरिया के महत्वपूर्ण सेक्शन को ही पढा जाना चाहिए। अब कुछ भी नया पढना अभ्यर्थियों के लिए घातक हो सकता है। शेष बचे समय का सही उपयोग कोर एरिया के फॉरमेटिंग तथा संग्रहित मुख्य बिंदुओं का रिविजन फायदेमंद हो सकता है।

राकेश कुमार

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