कंपकपाती ठंड से बचने के लिए तुम्हारे पास तो ढेरों रास्ते हैं, लेकिन पशु-पक्षी कडाके की सर्दी कैसे गुजारते हैं? क्या कभी यह खयाल आया? सोच में पड गए न। पर दिमाग पर ज्यादा जोर डालने की जरूरत नहीं है। माइग्रेशन, हाइबरनेशन जैसे कुछ खास तरीके हैं, जिनसे पशु-पक्षी ठंड में खुद का बचाव करते हैं। ये स्वाभाविक तरीके हैं, जो मौसम बदलते ही खुद-ब-खुद अपना लिए जाते हैं।
सर्दियों के मौसम में आप्रवासी पक्षी यानी दूसरे देशों के पक्षी झील और नदियों के किनारे अपना घर बना लेते हैं और सर्दी खत्म होते ही अपने-अपने गृहस्थान को लौटने लगते हैं। कुछ पक्षी तो लंबी दूरी तय कर एक महाद्वीप से दूसरे महाद्वीप तक का सफर भी करते हैं। मैमल्स जैसे, चमगादड, व्हेल आदि सर्दियां शुरू होते ही उन स्थानों पर चले जाते हैं, जहां का मौसम गर्म होता है। इस तरह, सर्दी से बचाव के लिए एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाना ही पलायन या माइग्रेशन कहलाता है।
सर्दियों के मौसम में कुछ एनिमल्स ठंड से बचने के लिए जमीन के अंदर या गुफाओं आदि में महीनों तक निष्क्रिय रूप से पडे रहते हैं। वे जाडे के मौसम में महीनों तक गहरी नींद में सो सकते हैं। इस खास प्रक्रिया को हाइबॅर्नेशन कहा जाता है।
दरअसल, सर्दी के दिनों में एनिमल्स के शरीर में खास बदलाव आते हैं। इनके बॉडी का तापमान गिर जाता है, सांस लेने की गति धीमी हो जाती है। शारीरिक ऊर्जा में कमी आती है। यही वजह है कि सर्दियां शुरू होने से पहले ये अतिरिक्त भोजन का भी जुगाड कर लेते हैं। भालू की बात करें, तो सामान्य दिनों में इसकी हार्ट बीट 40-50 बीट प्रति मिनट होती है, जो जाडे के मौसम में हाइबॅर्नेशन के दौरान गिरकर 8-12 बीट प्रति मिनट ही रह जाती है। इस दौरान भालू बिना खाए-पीए भी छह महीनों तक आराम से रह सकता है। दरअसल, कुछ ऐसे भी कोल्ड ब्लॅडेड एनिमल्स हैं, जिनके लिए अपने शरीर को गर्म रखना काफी मुश्किल होता है।
खासकर, मछलियां, मेंढक, सांप, कछुआ जैसे जीवों के सामने यह समस्या अधिक होती है। सांप या रेप्टाइल समूह के जीव सर्दियों से बचने के लिए बिलों में निष्क्रिय रूप से पडे रहते हैं और मौसम बदलने का इंतजार करते हैं। कछुआ और मेंढक जैसे जानवर तो पत्थर या पत्तों के नीचे दुबक कर रहने लगते हैं, जबकि कुछ जानवर सर्दी के मौसम से पहले ही पर्याप्त भोजन जमा कर लेते हैं और इसका उपयोग सर्दियों के दौरान करते हैं। सर्दी से बचने के लिए कुछ जानवर पेड की जडों और मिट्टी के अंदर बिल बना कर रहने लगते हैं। यानी अपने शरीर को विपरीत मौसम के अनुसार ढालने के लिए कोई-न-कोई उपाय ढूंढ ही लेते हैं।
जेजे टीम
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