नन्हे टाइमकीपर का पता

 
 
नन्हे टाइमकीपर का पता

यह सोने का टाइम है, नाश्ता करने के समय तक तेज भूख लग जाती है, सुबह नहाने के बाद नहीं, उसके पहले ब्रश करना है.. ये सारे फैसले हम खुद जरूर लेते हैं, लेकिन इसके पीछे हाथ होता है नन्हे टाइमकीपर का।

अब तुम कहोगे कि यह टाइमकीपर रहता कहां है। वह हमारे दिमाग के प्री-फ्रंटल कॉर्टेक्स में स्थित होता है। इसका पता अभी हाल ही में अमेरिका के मैसाच्युसेट्स इंस्टीट्यूट्स ऑफ टेक्नोलॉजी के वैज्ञानिकों ने लगाया है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह नन्हा टाइमकीपर न्यूरोन्स के समूह से बनता है। न्यूरोन्स दिनचर्या के काम और समय का रिकॉर्ड रखते हैं। दरअसल, काम और वक्त के इस अनोखे तालमेल को सुलझाना वैज्ञानिकों के लिए बडी चुनौती थी, इसलिए यह बडी उपलब्धि है। वैज्ञानिकों की मानें, तो इससे पर्किंसंस डिजीज का कारगर इलाज विकसित होने की उम्मीद बढ गई है।

आसान होगी मुश्किल:

ब्रिटेन के कंप्यूटर वैज्ञानिकों ने एक ऐसी तकनीक का इजाद किया है, जिनकी मदद से अब कठिन शब्दों के अर्थ भी आसानी से ढूंढे जा सकेंगे। ओडब्ल्यूएल-दो नामक इस तकनीक के माध्यम से मेडिकल, इंजीनियरिंग और वैज्ञानिकों को कठिन शब्दावलियों का मतलब ढूंढने में आसानी होगी। यानी आसान हो गई मुश्किल।

स्पेस में नई क्रांति:

कहते हैं ब्रह्मांड के गर्भ में कई अबूझ रहस्य हैं, जिनका पर्दाफाश करना वैज्ञानिकों के लिए बडी चुनौती है। लेकिन कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के वैज्ञानिक एक ऐसा सॉफ्टवेयर बनाने में जुटे हैं, जिससे तैयार की जा सकेगी रोबो सेना। एक ऐसी सेना, जो न केवल स्वतंत्र रूप से, बल्कि बतौर टीम भी मुश्किल टास्क को अंजाम दे सकेंगी। यह जमीन के साथ-साथ हवा और पानी में भी सक्रिय रूप से काम करेगी। यानी अंतरिक्ष एजेंसियों में ऐसे रोबोट छा जाएंगे, जो दौडने-भागने के अलावा, उडने और तैरने की कला में भी माहिर होंगे।

प्रमुख शोधकर्ता वोल्फगैंग फिंक की मानें, तो ऐसे रोबोट अकेले ही प्रकृति की विभिन्न चुनौतियों का डटकर सामना करने में सक्षम होंगे। समय रहते ये खतरे भांपकर वे इंजीनियरों की मदद लिए बगैर ही मिशन की सूरत तैयार कर सकेंगे। इस तरह, नए सॉफ्टवेयर की परिकल्पना यदि कारगर हुई, तो न केवल पारंपरिक सिंगल रोबोटिक स्पेसक्राफ्ट का दौर खत्म हो जाएगा, बल्कि समय की बचत के साथ-साथ जानमाल की हानि पर लगाम लग सकेगा। कुल मिलाकर, नया सॉफ्टवेयर स्पेस एक्सफ्लोरेशन की दिशा में क्रांति ले आएगा।

कहते हैं ब्रह्मांड के गर्भ में कई अबूझ रहस्य हैं, जिनका पर्दाफाश करना वैज्ञानिकों के लिए बड़ी चुनौती है। लेकिन कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के वैज्ञानिक एक ऐसा सॉफ्टवेयर बनाने में जुटे हैं, जिससे तैयार की जा सकेगी रोबो सेना।
 
     
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