
नई दिल्ली। पिछडे़ और गरीब देशों को विकास के अवसरों का भरोसा न मिलने तक कोई भी व्यापार वार्ता कामयाब नहीं होगी। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री कमलनाथ ने विकसित देशों को यह चेतावनी देते हुए स्पष्ट कहा कि हम विश्व व्यापार संगठन [डब्ल्यूटीओ] की दोहा दौर की वार्ता को विकासशील देशों के बाजार खुलवाने का उपक्रम नहीं बनने देंगे। कमलनाथ ने यह बात ऐसे समय की है जबकि डब्ल्यूटीओ के महानिदेशक पास्कल लामी ने इस वर्ष के अंत तक नया व्यापार समझौता होने की उम्मीद जताई है।
वाणिज्य मंत्री ने माना कि व्यापार वार्ता इस समय नाजुक दौर में है पर उन्होंने आगाह किया कि इसकी सफलता कई अहम मुद्दों पर टिकी है। उन्होंने कहा कि भारत की सबसे पहली चिंता है अपने किसानों और गरीबों की आजीविका की सुरक्षा करना। उसके बाद ही देश दूसरी किसी बात पर विचार करेगा।
कृषि पर बड़ी आबादी के आश्रय की दुहाई देते हुए भारत अपने कृषि बाजार को विदेशी बाजार के जोखिमों से बचाने के लिए पर्याप्त रूप से संरक्षित रखने का अधिकार चाहता है। उसकी यह भी मांग है कि विकसित देशों में किसानों को मिलने वाली भारी सरकारी सहायता में बड़ी कटौती की जाए। भारत जैसे देशों के किसानों की व्यापार क्षमता पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। कमलनाथ ने कहा है कि विकसित देश विशेष उत्पादों के मामले में पारदर्शिता का नया मुद्दा उठा कर इस विषय को नए सिरे से खोलना चाहते हैं जो हमें स्वीकार्य नहीं है।