
नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। दिल्ली एयरपोर्ट का इंतजाम संभाल रहे जीएमआर समूह ने दो साल बाद भी एयरपोर्ट पर हालात न सुधरने का सारा दोष अफसरशाही के मत्थे मढ़ दिया है। जीएमआर से जुड़ी संयुक्त उद्यम कंपनी दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट्स लिमिटेड [डायल] के प्रबंध निदेशक जीएम राव ने योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया से मुलाकात में कहा कि उनकी कंपनी तो बहुत तेजी से काम करना चाहती है, मगर अफसरशाही अड़ंगों ने उसे लाचार कर दिया है। फिर भी कंपनी अपनी ओर से यात्रियों को बेहतर सहूलियतें देने के हर संभव प्रयास कर रही है।
डायल में जीएमआर समूह एवं इससे जुड़ी विदेशी कंपनी की बहुमत हिस्सेदारी है,जबकि अल्पमत हिस्सेदारी एयरपोर्ट अथारिटी की है। दो साल पहले कंपनी को दिल्ली एयरपोर्ट के आधुनिकीकरण की जिम्मेदारी सौंपी गई थी और इसका पहला चरण वर्ष 2010 में राष्ट्रमंडल खेलों से पहले पूरा होना है। इसके तहत एयरपोर्ट में नए टर्मिनल का निर्माण किया जा रहा है। इस बीच हवाई यातायात बढ़ने से एयरपोर्ट के मौजूदा टर्मिनलों की हालत पहले से भी ज्यादा खराब हो गई है। यात्रियों को चेक-इन तो हवाई जहाजों को लैंडिंग एवं टेक-आफ के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है। इन हालात में साधारण तो साधारण,वीआईपी यात्रियों के लिए भी मुसीबतें खड़ी हो गई हैं। पिछले दिनों योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया भी एयरपोर्ट की इन्हीं बदइंतजामियों का शिकार हो गए थे। नतीजतन उन्होंने नाराज होकर अगले दिन डायल और जीएमआर के अफसरों को अपने दफ्तर बुला लिया और उनसे जल्द से जल्द हालात सुधारने को कहा। डायल अफसरों ने शिकायत की कि उन्हें सरकारी एजेंसियों की तरफ से पर्याप्त सुरक्षा बल उपलब्ध नहीं कराए जा रहे। डायल के प्रबंध निदेशक ने भी मोंटेक के सामने कुछ ऐसा ही दुखड़ा रोया।
इस पर मोंटेक ने आश्वासन दिया कि सुरक्षाबलों की कमी दूर करने के लिए वह सरकार से कहेंगे। मगर राव ने लगे हाथों मोंटेक को डायल की नई योजना की जानकारी दी जिसके तहत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर एक अस्थायी टर्मिनल बनाया जाएगा।
यह अजीबोगरीब है कि दिल्ली एयरपोर्ट की बदहाली दूर करने में योजना आयोग उपाध्यक्ष को हस्तक्षेप करना पड़ रहा है। जबकि यह जिम्मेदारी उड्डयन मंत्रालय की है जो इस हस्तक्षेप से असहज महसूस कर रहा है। यही वजह है कि नागरिक उड्डयन मंत्री प्रफुल्ल पटेल ने पिछले दिनों मोंटेक को एक पत्र लिखा। व्यंग्यात्मक शैली में लिखे इस खत में उन्होंने दिल्ली एयरपोर्ट के आधुनिकीकरण में हो रही देरी के लिए राजनीतिक वजहों को जिम्मेदार ठहराया। साथ ही कहा कि योजना आयोग को अन्य विभागों की गड़बड़ियों पर भी निगाह डालनी चाहिए।