नई दिल्ली। सुप्रीमकोर्ट ने 1992 में हुए प्रतिभूति घोटाले के एक मामले में शेयर ब्रोकर हितेन दलाल और एस मोहन को बरी कर दिया। दलाल को मुंबई की एक स्थानीय अदालत ने सात साल की कैद और डेढ़ लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई थी। दलाल पर केनरा बैंक से 33 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप था।
मुख्य न्यायाधीश केजी बालाकृष्णन की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने शुक्रवार को इन दोनों को बरी करते हुए कहा कि सीबीआई इनके खिलाफ आरोप सिद्ध नहीं कर पाई। सीबीआई ने इनके खिलाफ 1994 में चार्जशीट दाखिल की थी। इस मामले में सीबीआई ने भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं 409 [विश्वासघात], 120 बी [आपराधिक षडयंत्र] और 411 [चोरी की संपत्ति रखने] के आरोप लगाए थे।
इस मामले में सीबीआई ने दलाल समेत चार को आरोपी बनाया था। इनमें से दो को विशेष अदालत ने ही बरी कर दिया था। दलाल और मोहन ने विशेष अदालत की सजा को सुप्रीमकोर्ट में चुनौती दी थी।