महंगाई में थोड़ी नरमी पर बढ़ेंगी ब्याज दरें!

 
Jul 25, 02:17 am

नई दिल्ली [जयप्रकाश रंजन]। दो दिन पहले ही लोकसभा में विश्वास मत हासिल कर चुकी यूपीए सरकार को महंगाई के मोर्चे से भी कुछ राहत भरी खबर मिली है। महंगाई की दर लगभग पांच महीनों तक लगातार बढ़ने के बाद 12 जुलाई को समाप्त सप्ताह के दौरान 0.02 फीसदी कम होकर 11.89 फीसदी हो गई है।

यह खबर केंद्र सरकार को भले ही कुछ खुश कर दे, लेकिन आम जनता को इससे कुछ खास फायदा मिलने वाला नहीं है। दरअसल, रिजर्व बैंक ने महंगाई की स्थिति में कोई खास सुधार होते नहीं देख एक बार फिर ब्याज दरों को बढ़ाने का मन बना लिया है। उधर,ब्याज दरों में वृद्धि की एक और संभावना से उद्योग जगत भी हिल गया है। देश के एक बड़े उद्योग चैंबर एसोचैम ने तो साफ कह दिया है कि ब्याज दरों को बढ़ाने का एक ही मतलब है कि अर्थव्यवस्था में मंदी।

एसोचैम ने अर्थंव्यवस्था की मौजूदा स्थिति को बेहद चिंताजनक बताते हुए कहा है कि इसके लंबे समय तक मंदी में जाने के आसार बन रहे हैं। इसका सबसे भयंकर परिणाम बेरोजगारी के तौर पर हो सकता है। एसोचैम के अध्यक्ष सज्जन जिंदल का कहना है कि देश में इस समय बेरोजगारी की दर 7.29 फीसदी है। ऐसे में हम आईटी, फार्मा, आटोमोबाइल, कंस्ट्रक्शन जैसे रोजगार देने वाले क्षेत्रों में मंदी से स्थिति और खराब होगी।

हालांकि उद्योग जगत का तर्क आरबीआई गवर्नर के गले उतरेगा, इस बात की संभावना कम ही है। रिजर्व बैंक 29 जुलाई को वार्षिक मौद्रिक नीति की पहली समीक्षा करेगा और संभावना है कि इसमें एक बार फिर रेपो दर और नकद आरक्षित अनुपात [सीआरआर] में 25-25 आधार अंकों की बढ़ोतरी की जाएगी।

इसके पहले 30 जून, 2008 को रेपो दर और सीआरआर में आधा-आधा फीसदी की वृद्धि की गई थी। सूत्रों के मुताबिक वित्त मंत्रालय ने भी रिजर्व बैंक को हरी झंडी दे दी है कि वह अगले तीन-चार महीने के भीतर महंगाई की दर को 6-7 फीसदी पर लाने के लिए उचित उपाय कर सकता है।

उधर, वित्त मंत्रालय के मुताबिक 12 जुलाई को समाप्त सप्ताह में 98 प्राथमिक उत्पादों में से 10 उत्पादों की थोक कीमतों में गिरावट देखी गई है। जबकि 54 उत्पादों की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। इस अवधि में खाद्य तेल,कपास तेल, नारियल तेल व मसाले की कीमतें कम हुई हैं। हालांकि काफी, फल, सब्जियां, मांस, उड़द दाल, मूंग दाल, अरहर दाल की कीमतें थोड़ी तेज हुई हैं। महंगाई में थोड़ी नरमी के बावजूद इस बात की संभावना कम ही है कि अगले दो-तीन महीनों तक इसकी दर बहुत नीचे आएगी। वित्त मंत्रालय समेत कई अन्य एजेंसियों तक ने कहा है कि महंगाई की दर दोहरे अंकों में ही रहेगी।




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