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सीआरआर में आधा फीसदी की कटौती

Oct 06, 07:09 pm
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मुंबई। ब्याज दरों पर दबाव कम करते हुए भारतीय रिजर्व बैंक [आरबीआई] ने सोमवार को नकद आरक्षित अनुपात [सीआरआर] में आधा फीसदी [0.50 फीसदी] की कमी करने की घोषणा की है जिससे बैंकिंग तंत्र में तरलता बढ़ाई जा सके।

इस पहल से बैंकों को कमतर व्यावसायिक ऋण दरों के लिए राजी किया जा सकता है। सीआरआर जमा राशि का वह अनुपात होता है जिसे बैंकों को आरबीआई के पास रखना पड़ता है।

रिजर्व बैंक द्वारा जारी बयान के मुताबिक 11 अक्तूबर से सीआरआर घटकर 8.5 फीसदी पर आ जाएगा जिससे बैंकिंग तंत्र में करीब 20000 करोड़ रुपये आने की उम्मीद है। उल्लेखनीय है कि जून 2003 के बाद सीआरआर में पहली बार कटौती की गई है।

रिजर्व बैंक ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय और घरेलू घटनाक्रमों के संदर्भ में मौजूदा तरलता परिस्थिति की समीक्षा करते हुए सीआरआर आधा फीसदी घटाकर 8.5 फीसदी करने का निर्णय किया गया है। विश्वभर के केंद्रीय बैंक तरलता संकट को रोकने के लिए बैंकिंग तंत्र में नकदी झोंक रहे हैं।

रिजर्व बैंक ने कहा कि विश्वभर के केंद्रीय बैंकों ने समन्वय स्थापित करने सहित तरलता परिचालन बढ़ा दिया है। ओरिएंटल बैंक आफ कामर्स के कार्यकारी निदेशक एच रत्नाकर हेगड़े ने कहा कि आरबीआई के इस कदम से तरलता का दबाव घटेगा और कर्ज का प्रवाह बढ़ने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा मध्यम अवधि में ब्याज दरों पर दबाव घटाने में मदद मिलेगी। लेकिन ब्याज दरों में तत्काल कमी की संभावना से उन्होंने इनकार किया।

बैंक के इस कदम के संबंध में विशलेषकों का कहना है कि यह बाजार की जरूरत है और यह कदम आक्सीजन की तरह है। प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के प्रमुख सुरेश तेंदुलकर के मुताबिक रिजर्व बैंक का यह कदम कड़ी मौद्रिक नीति को संभवत नरम बनाने की तरफ है। बैंकिंग तंत्र में तरलता की तंगी महसूस की जा रही है। रिजर्व बैंक का यह कदम मूलरूप से तरलता में सुधार करने के लिए उठाया गया।

तेंदुलकर ने कहा कि महंगाई की दर स्थिर हैं। अंतरराष्ट्रीय और घरेलू बाजार में तरलता की तंगी के चलते यह कदम उठाया गया है। इससे निवेश बना रहेगा। कहा जा सकता है कि यह कदम विकास को बनाए रखने के लिए है।

आईसीआईसीआई सिक्यूरिटीज के विशलेषक ए प्रसन्ना ने कहा कि रिजर्व बैंक धन की निकासी के कारण मुद्रा बाजारों पर बन रहे दबाव को दूर करने में जुटा हुआ है और बैंक का यह कदम शुद्ध रूप से तरलता प्रबंधन के तहत उठाया गया है।

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