नई दिल्ली। भारत ने कहा है कि वह दोहा दौर की व्यापार वार्ताओं को सिरे चढ़ाने भर के लिए मूल विषयों से कोई समझौता नहीं करेगा। उसका कहना है कि बहुपक्षीय समझौता होने से पहले उसकी चिंताओं का निराकरण होना चाहिए।
वाणिज्य मंत्री कमलनाथ ने भारत आर्थिक शिखर सम्मेलन में कहा कि समन्वय की संभावना तलाशने के लिए बातचीत जेनेवा में चल रही है। इसका मतलब यह नहीं कि हम उन मूल विषयों पर समझौता करेंगे जो हमने उठाए हैं। समयसीमा से पहले वार्ताओं को सिरे चढ़ाने के लिए एक और मंत्री स्तरीय बैठक के सवाल पर उन्होंने कहा कि समयसीमा के कारण हमारी चिंताओं की विषयवस्तु नहीं बदल जाएगी। भारत की चिंताओं में लघु एवं सीमांत किसानों के जीविकोपार्जन पर पड़ने वाला असर भी शामिल है।
दोहा वार्ता पर सहमति, तारीख तय नहीं
जेनेवा। विश्व व्यापार संगठन डब्ल्यूटीओ दोहा दौर की वार्ताएं पूरी करने के लिए हरसंभव प्रयास करने को तैयार है लेकिन इसके लिए मंत्रिस्तरीय बैठक की तारीख तय नहीं की गई है।
डब्ल्यूटीओ में ब्राजील के दूत रोर्बटो अजेवेदो ने इसके महानिदेशक पास्कल लेमी से मुलाकात करने के बाद संवाददाताओं से कहा कि विश्व व्यापार से संबद्ध बातचीत आने वाले सप्ताहों में शुरू हो सकती है। उन्होंने कहा कि जी 20 की बैठक से मिले संकेतों पर सब सहमत है और हमें इन्हें कार्रवाई में बदलने की जरूरत है।
विश्व नेताओं ने जी 20 की बैठक में दोहा दौर की वार्ताओं को शुरू करने पर सहमति जताई है। इन नेताओं का कहना था कि दोहा दौर की वार्ताओं का सफलता पूर्वक समापन होने से विश्व अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा। डब्ल्यूटीओ की दोहा दौर की वार्ताएं जुलाई में किसानों को सब्सिडी देने के मुद्दे पर अमेरिका और भारत के नेतृत्व में विकासशील देशों के बीच तीखे मतभेद उभरने से ध्वस्त हो गई थी।
इस बीच नई दिल्ली में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री कमलनाथ ने कहा कि विश्व व्यापार संगठन डब्ल्यूटीओ की दोहा दौर की वार्ताओं के दौरान कृषि क्षेत्र समेत मुख्य मुद्दों पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। हालांकि श्री कमलनाथ ने कहा कि दोहा वार्ताओं को जारी रखने के प्रयासों के तहत संबद्ध देशों की मंत्रिस्तरीय बैठक का आयोजन किया जा सकता है।
कमलनाथ ने कहा कि सवाल यह नहीं कि मंत्रिस्तरीय बैठक हो रही है या नहीं बल्कि सवाल है कि बैठक से मकसद पूरा होता या नहीं। विश्व नेताओं ने शनिवार को दोहा दौर की वार्ताओं को पुन: शुरू करने पर सहमति जताई और कहा कि अगले 12 महीनों में व्यापार के कोई अवरोधक नहीं लगाए जाने चाहिए।