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नहीं डूबेगी अर्थव्यवस्था की कश्ती

Nov 21, 11:23 am
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नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। विश्वव्यापी गंभीर आर्थिक मंदी के बावजूद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को भारतीय अर्थव्यवस्था की 'कश्ती' बचा लेने का पूरा भरोसा है। उन्होंने कहा कि मंदी के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था आठ फीसदी की दर से बढ़ेगी।

विकास दर को बनाए रखने के लिए सरकार जरूरी आर्थिक कदम उठा रही है। उधर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने उदार अर्थव्यवस्था की वकालत तो की, मगर इसमें गरीबों की बलि न चढ़े इसका ध्यान रखे जाने की बात कही।

एक सम्मेलन में मनमोहन सिंह ने माना कि आर्थिक मंदी का यह दौर काफी गंभीर है, लेकिन वर्ष 1991 के आर्थिक संकट से ज्यादा नहीं। वित्तीय कदमों के बल पर हम न केवल मंदी का मुकाबला कर सकेंगे बल्कि विकास दर भी 8 फीसदी बनाए रखेंगे। इसके लिए सरकार वित्तीय, मौद्रिक, सार्वजनिक निवेश, विनिमय दर सहित तमाम विकल्पों का सहारा लेगी। प्रधानमंत्री का कहना था कि मंदी का अंदेशा पहले से ही था, इसलिए चालू बजट में सामाजिक विकास कार्यक्रमों के लिए अधिक राशि आवंटित की गई।

प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारे पास संसाधन और इच्छाशक्ति दोनों हैं। उद्योग जगत बस सरकार के साथ मिलकर काम करे तो इस चुनौती से उबरने में भारत पूरी तरह सक्षम है। प्रधानमंत्री ने मंदी के लिए अमीर देशों को खासतौर से जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि इसकी सबसे ज्यादा मार विकासशील राष्ट्रों पर पड़ रही है। प्रधानमंत्री ने प्रतिस्पर्धा,धर्म और संप्रदाय की राजनीति पर कठोर प्रहार भी किया और कहा कि ऐसी राजनीति इस चुनौती से निपटने में बाधा बन सकती है।

उधर सोनिया गांधी ने भी कहा कि गरीब और कमजोर तबकों को मंदी के बुरे असर से बचाने के लिए ठोस कदम उठाना जरूरी है। उन्होंने सरकार को घबराहट से बचने की नसीहत दी,परंतु उदारीकरण का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि उदार अर्थव्यवस्था को नियंत्रित ढांचे में रखते हुए भारत इस संकट से उबर सकेगा। बैंकों का राष्ट्रीयकरण करने के पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के फैसले का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि इसी दूरदर्शिता की वजह से ही मंदी के इस दौर में भी हमारे बैंकों की मजबूती कायम है। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि सरकार की तरह उद्योगपतियों को भी सामाजिक क्षेत्र में पूंजी लगानी चाहिए।

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