न्यूयार्क। वित्तीय बवंडर के चलते आई ग्लोबल आर्थिक मंदी ने सिटीग्रुप को बिकने के कगार पर पहुंचा दिया है। अमेरिका का यह दूसरा सबसे बड़ा बैंक अरबों डालर घाटे के बोझ तले दबा हुआ है। एक दिन पहले इसके शेयरों में 25 फीसदी की भारी गिरावट आई है। भारतीय मूल के विक्रम पंडित की अगुवाई वाला यह बैंक बचने की कोई सूरत न देख अब अपना कारोबार बेचने या किसी अन्य फर्म के साथ विलय पर विचार करने को मजबूर हो गया है। इससे पहले सब-प्राइम संकट के चलते आई वित्तीय भंवर में लेहमन ब्रदर्स समेत अमेरिका के 19 बैंक डूब चुके हैं।
अमेरिकी कारोबारी पत्रिका वालस्ट्रीट जर्नल के अनुसार अभी यह बातचीत आंतरिक स्तर पर ही चल रही है। आगामी सोमवार को बैंक के निदेशक मंडल की बैठक में हिस्सेदारी की बिक्री या विलय के प्रस्ताव पर विचार किया जाएगा।
कुछ दिन पहले बैंक ने अपने 52 हजार कर्मचारियों की छंटनी का ऐलान किया था। इस खबर के आने के बाद निवेशकों में खलबली मच गई। इसके चलते बैंक के शेयरों के दाम 14 वर्षो के न्यूनतम स्तर पांच डालर से नीचे चले गए थे। इस माह बैंक की बाजार कीमत गिरकर 48.7 अरब डालर तक पहुंच गई है। अकेले इसी हफ्ते बैंक के शेयरों में 50 फीसदी गिरावट आई है।
सिटीग्रुप ने अपने निवेशकों को आश्वस्त करने की कोशिश में कहा है कि उसका पूंजी आधार तथा तरलता की स्थिति काफी मजबूत है। बैंक ने अब लाभ कमाने के लिए एक नई रणनीति बनाई है। इससे पहले बृहस्पतिवार को सऊदी अरब के सुल्तान अलवालिद बिन तलाल ने बैंक में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर पांच फीसदी करने का ऐलान किया है। उन्होंने 1991 में भी इस बैंक 59 अरब डालर की पूंजी लगाकर बचाया था।
बैंक को फिलहाल सरकार से कोई वित्तीय मदद नहीं मांग रहा है। कुछ निवेशकों का मानना है कि मौजूदा समय में हिस्सेदारी की बिक्री या कारोबार को बेचने से पूंजी जुटाना काफी कठिन होगा। इसके बजाय यह भी संभव है कि पिछले माह घोषित 700 अरब डालर के पैकेज में से सरकार 25 अरब डालर इस बैंक को दे सकती है।