
नई दिल्ली। सरकार की उम्मीदों के विपरीत हवाई ईधन की कीमतों में कमी के बावजूद निजी एयरलाइनों विशेष तौर से जेट एयरवेज ने हवाई किराया कम करने से इनकार कर दिया है।
जेट एयरवेज के अध्यक्ष नरेश गोयल ने शनिवार को हिंदुस्तान टाइम्स नेतृत्व सम्मेलन में एक प्रश्न के उत्तर में कहा कि इस समय उनकी एयरलाइन किराया कम करने की स्थिति में नही है। उन्होंने कहा कि अभी किराया कम करके हम अपनी कंपनी को बंद नही करना चाहेंगे। जब फायदा होगा तभी कर पाएंगे।
गोयल ने जब यह घोषणा की तब उनके साथ मंच पर नागरिक उड्डयन मंत्री प्रफुल्ल पटेल और किंगफिशर एयरलाइन से अध्यक्ष विजय माल्या भी मौजूद थे। उन्होंने कहा कि सरकार चाहे तो किराया तय करने के नियामक संस्था बना दे। हम उसे अपनी पूरा बही खाता दिखाने को तैयार है। अगर उसे फायदा दिखाई देगा और हमारे सारे खर्चे पूरे होते होंगे तभी हम किराया कम कर पाएंगे।
किराये में कमी की आस लगाए पटेल ने गोयल के नियामक संस्था बनाने के सुझाव को तत्काल खारिज करते हुए कहा कि निजी एयरलाइन कंपनियां नियमों में छूट दिए जाने के कारण ही अस्तित्व में आई है। अब वे घाटे में आने के बाद लाभ के लिए नियामक संस्था से बंधना चाहती है तो ये संभव नही है।
प्रफुल्ल पटेल ने निजी एयरलाइनों को सचेत करते हुए कहा कि सरकार उन्हें राहत देने के लिए कई कदम उठाये हैं। सच्चाई तो यह है कि एयरलाइनें हवाई किराये कम करें अन्यथा घाटे के कारण जनता और सरकार की उनके प्रति इस समय जो सहानुभूति है वह खत्म हो जाएगी।
पटेल ने कबूल किया कि सरकार की हवाई ईधन पर कर वसूली में गलत कर नीतियों के कारण पिछले साढे़ चार वर्षो में देश में एयरलाइनों अपेक्षा के अनुरूप विकास नही हो सका। लेकिन यह भी एक कड़वा सच है कि सरकार की जिम्मेदारी इस उद्योग की मदद करना नही है बल्कि सिर्फ सुविधाएं मुहैया कराना भर है।
उन्होंने घाटे में चल रही घरेलू एयरलाइनों से अपनी सोच बदलने की अपील की और कहा कि उन्हें कार्गो सेवा में भी किस्मत आजमानी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार ने हवाईअड्डों के विकास के लिए ठोस पहल किये हैं और उम्मीद है कि अगले दो साल में देश में अंतरराष्ट्रीय स्तर के छह हवाई अड्डे बनकर तैयार हो जाएंगे। घरेलू एयरलाइनों को इन्हें अपनी सेवा का प्रमुख केंद्र बनाने की कोशिश करनी चाहिए और आपस में ही प्रतिस्पर्धा से बचना चाहिए।
विजय माल्या ने स्वीकार किया कि हवाई ईधन की कीमतें कम होने से खर्च में कमी आई है लेकिन अभी घाटा बहुत है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के मामले में विदेशी और घरेलू एयरलाइनों की उड़ानों की संख्या में भारी अंतर को कम करने के लिए सरकार से कदम उठाने की मांग की।
जेट कर्मियों के वेतन में हो सकती है कटौती
मुंबई। आर्थिक मंदी के मद्देनजर देश की सबसे बड़ी निजी एविएशन कंपनी जेट एयरवेज अपने पायलटों, इंजीनियरों और कुछ अन्य कर्मचारियों के वेतन में 20 फीसदी की कटौती की घोषणा कर सकती है। इस बीच सरकार ने एविएशन कंपनियों से किराया घटाने को कहा है, लेकिन जेट एयरवेज ने किराया कम करने से इनकार किया है।
वेतन कटौती के मुद्दे पर विचार के लिए चेयरमैन नरेश गोयल ने कंपनी के अधिकारियों, पायलटों और इंजीनियरों की रविवार को बैठक बुलाई है। इसमें वेतन कटौती की घोषणा की जा सकती है। कंपनी के इस संभावित कदम को लेकर पायलटों और इंजीनियरों ने विरोध जताया है। जेट एयरवेज में लगभग 13 हजार 200 कर्मचारी हैं। इनमें से करीब 2 हजार कर्मचारियों का वेतन एक लाख रुपये प्रतिमाह से ज्यादा है। इनमें मुख्य रूप से पायलट और इंजीनियर शामिल हैं।
लागत घटाने के लिए पिछले महीने जेट एयरवेज ने अपने 1900 कर्मचारियों की छंटनी कर दी थी, लेकिन बाद में उसे राजनीतिक दबाव में अपना यह फैसला वापस लेना पड़ा था। कर्मचारियों को बहाल करते समय गोयल ने कहा था कि लागत में कटौती की जाएगी, लेकिन नौकरियों की कीमत पर नहीं। इसके बजाय उन्होंने अन्य कदम उठाने की बात कही थी।
भारी-भरकम घाटे, बढ़ती परिचालन लागतों और ऊपर से यात्रियों की घटती संख्या से परेशान जेट अब वेतन कटौती का कदम उठाने जा रही है। कंपनी को वित्त वर्ष 2008-09 के दौरान करीब 1890 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा होने का अनुमान है।