
नई दिल्ली। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी [माकपा] ने अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संकट से उत्पन्न आर्थिक मंदी से निपटने के मनमोहन सिंह सरकार के कदमों को विलंबित तथा नाकाफी बताया है। साथ ही कहा है कि केवल टैक्स कटौती से संकट नही टलेगा इसके लिए आम जन की आय बढ़ाने तथा रोजगार के अवसर पैदा करनेके उपायों पर सार्वजनिक व्यय बढ़ाना होगा।
माकपा के प्रमुख सांगठनिक निकाय पोलित ब्यूरो ने मंगलवार को यहां एक वक्तव्य में कहा कि योजना खर्च में 20000 करोड़ रुपये की बढ़ोत्तरी तथा केंद्रीय मूल्य विर्द्धत कर [सेनवैट] में कटौती जैसे कदम देर से उठाए गए और अपर्याप्त कदम है।
पोलित ब्यूरो ने याद दिलाया कि नागरिक उड्डयन क्षेत्र को इसी क्रम में दी गई प्रत्यक्ष कर राहतों के बाद क्षेत्र की निजी कारपोरेट कंपनियों ने खुदरा मूल्यों में कटौती के प्रति अनिच्छा जाहिर कर दी है। पार्टी ने कहा है कि उद्योग अगर खुदरा दरें कम न करे तो ऐसी रियायतों से केवल कारपोरेट मुनाफा ही बढ़ेगा।
ब्याज दरों पर मामूली सब्सिडी तथा निर्यात आधारित क्षेत्र को दी जा रही कर राहतों को भी नौकरियों में भारी हानि की प्रक्रिया को उलट पाने के लिहाज से बेकार बताते हुए माकपा ने कहा है कि उद्योग को ये रियायतें छंटनी रोकने की शर्तो के साथ ही दी जानी चाहिएं। वक्तव्य में लौह अयस्क पर निर्यात कर समाप्त करने को भी पतनशील कदम बताते हुए कहा गया है कि यह देश हित में नहीं है।
पोलित ब्यूरों ने कांग्रेस नीत संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार से कामगार तबकों के सरोकारों को ध्यान में रखते हुए रोजगार के अवसर पैदा करने, इन तबकों की आय बढ़ाने के लिए कृषि, राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी, स्वास्थ्य, शिक्षा, ग्रामीण सडकों, मध्य एवं निम्न आय वर्गो के लिए मकान निर्माण तथा सार्वजनिक वितरण प्रणाली को सार्वजनिक बनाने आदि के कार्यक्रमों पर सरकारी निवेश बढ़ाने की मांग भी की।