
नई दिल्ली। घाटे से उबरने की कोशिश में एयर इंडिया ने अपने खर्च में कटौती करने की कवायद शुरू कर दी है। इसके लिए कंपनी ने पायलटों को हवाई ईधन की बचत करने के नुस्खे बताने के साथ ही उनके यात्रा, फोन और अन्य भत्तों पर लगाम कस दी है।
एयर इंडिया के सूत्रों के अनुसार खर्च में कटौती के उपाय सुझाने के लिए प्रबंधन ने कई कमेटियां बनाई थीं जिनके सुझावों पर अमल शुरू कर दिया गया है। यही नहीं लास एंजिलिस, सोल और दरूल सलम जैसे कुछ स्थानों क घाटे वाली उड़ानें बंद कर दी गई हैं।
अब तक कर्मचारियों पर भत्तों और अन्य सुविधाओं के लिए करोड़ों रुपये खर्च करने वाली पूर्ववर्ती एयर इंडिया और इंडियन एयरलाइंस के विलय के बाद बनी एयरइंडिया ने फोन, मोबाइल फोन, वर्दी, बिजली और पेट्रोल भत्तों में भारी कटौती कर दी है जिससे सालाना करीब 200 करोड़ रुपये की बचत होने का अनुमान है।
सूत्रों के अनुसार मुंबई स्थित एयर इंडिया के मुख्यालय में कर्मचारियों की सीधे फोन करने की सुविधा खत्म कर दी गई है। अब वे पीबीएक्स के माध्यम से रजिस्टर में एंट्री करके ही स्थानीय काल कर रहे हैं। अकेले इस फैसले से कंपनी को सालाना 25 करोड़ रुपये से अधिक बचत होने की उम्मीद है।
इसके अलावा अधिकारियों का फोन भत्ता दो हजार रुपये से घटा कर एक हजार रुपये, पेट्रोल भत्ता 100 लीटर से घटाकर 40 लीटर प्रतिमाह और महाप्रबंधकों के निवास का बिजली भत्ता 4000 से घटाकर 2100 रुपये कर दिया गया है। अवकाश यात्रा भत्ता के तहत विदेश यात्रा के लिए दिए जाने वाले टिकट बंद कर दिए हैं और घरेलू यात्रा के लिए प्रत्येक वर्ग के एक एक टिकट कम कर दिए गए हैं।
एयरलाइन ने अपने पायलटों को ईधन बचाने के लिए आईएटीए ग्रीन टीम द्वारा सुझाए गए उपायों को लागू करने की दिशा में कदम उठाए हैं जिनके अनुसार एयरलाइन अपने यहां मामूली सुधार कर 19 करोड़ 80 लाख अमेरिकी डालर की सालाना बचत कर सकती हैं।
कंपनी इन उपायों के तहत आधुनिक फ्लाइट प्लानिंग सिस्टम, एकीकृत आपरेशनल कंट्रोल रूम बनाने के साथ पायलटों को हवाई अड्डे पर टैकीइंग के दौरान एक इंजन का इस्तेमाल करने का निर्देश दिया है।