
टोक्यो। दुनिया में मंदी का और संकट गहरा गया है। अमेरिका, यूरोप और जापान के बाद कनाडा भी औपचारिक रूप से मंदी के चपेट में आ गया है। जापान पर मंदी की कुछ ज्यादा ही मार पड़ रही है। तीसरी तिमाही के दौरान यहां की जीडीपी की दर और आधा फीसदी सिमट गई है। निर्यात में गिरावट के साथ-साथ घरेलू मांग में भी कमी दर्ज की गई है। इससे जापान में बिना बिके उत्पादों का भंडार लगना शुरू हो गया है। मंदी की विकराल होती समस्या से निपटने के लिए जापान 216 अरब डालर का एक और प्रोत्साहन पैकेज लाने पर विचार कर रहा है। इससे पहले जापान ने 51 अरब डालर का प्रोत्साहन पैकेज पेश किया था।
मंदी के गहराने का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि देश की दिग्गज इलेक्ट्रानिक्स कंपनी सोनी अपने 16 हजार कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाने जा रही है। इनमें 8 हजार स्थायी तथा इतने ही अस्थायी कर्मचारी हैं। दुनिया भर में कंपनी के कुल कर्मचारियों की संख्या एक लाख 60 हजार से अधिक है।
आमतौर पर जापानी कंपनियां छंटनी का विकल्प अपनाने से कतराती हैं पर मंदी के कारण उन्हें अपने इस सिद्धांत को त्यागना पड़ रहा है। सोनी का अनुमान है कि पांच फीसदी की इस छंटनी से उसे अगले वित्त वर्ष यानी 2009-10 में 1.1 अरब डालर की बचत होगी।
मंदी के भंवर से निकलने के लिए अमेरिका की विशालतम केमिकल कंपनी डो केमिकल्स ने अपनी 20 फैक्टरियां बंद करने का ऐलान किया है। कंपनी अपने 5 हजार कर्मचारियों की छंटनी भी करेगी। मांग में आई कमी के मद्देनजर दुनिया की सबसे बड़ी स्टील कंपनी आर्सेलर मित्तल भी जर्मनी एवं बेल्जियम में डेढ़ हजार से ज्यादा नौकरियां खत्म करने जा रही है।
इस बीच अमेरिका के दिग्गज मीडिया घराने ट्रिब्यून ने दीवालया संरक्षण पाने के लिए आवेदन कर दिया है। अमेरिका के प्रमुख अखबारों में शामिल शिकागो ट्रिब्यून और लास एंजिलिस टाइम्स समेत आठ बड़े समाचार पत्रों व 23 टीवी चैनलों का स्वामित्व ट्बि्यून के पास है। इसके दीवालिया होने से इन अखबारों व चैनलों के भविष्य पर भी प्रश्नचिह्न लग गया है। मंदी के कारण बीते कई महीनों के दौरान ट्रिब्यून की विज्ञापन से होने वाली आय व सर्कुलेशन काफी घट गया है।